केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची में संशोधन का कार्य जारी है। इसी बीच जम्मू जिला प्रशासन की ओर से नए वोटरों के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद से सियासी बवाल मच गया है। नए आदेश अनुसार जम्मू जिले में एक साल से रह रहे गैर स्थानीय लोगों के लिए मतदाता सूची तक की राह आसान हो गई है।
नए आदेश के मुताबिक, जम्मू जिले में जो भी शख्स एक साल से अधिक समय से रह रहा है, वह अपना नाम वोटर लिस्ट में डलवा सकता है। अधिसूचना में कहा गया है कि नया मतदाता बनाने के लिए जरूरी कागजात जैसे पिछले एक साल का गैस, बिजली और पानी कनेक्शन सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक और जमीन के कागजात से अपना नाम रजिस्टर्ड करवाया जा सकता है।
जम्मू की उपायुक्त अवनी लवासा ने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए आदेश दिया कि जम्मू में जो भी शख्स एक साल से अधिक समय से रह रहा है, उसे नए वोटर के रूप में रेजिस्टर किया जाए। उनके इस फैसले के बाद अगर कोई बाहरी व्यक्ति भी एक साल से अधिक समय तक जम्मू में रहता है तो उसे वोटिंग का अधिकार मिल जाएगा।
मतदाता सूची के विशेष संशोधन के बाद जम्मू-कश्मीर को बाहरी लोगों सहित लगभग 25 लाख अतिरिक्त मतदाता मिलने की संभावना है। हालांकि, गैर स्थानीय लोगों को मतदान के अधिकार के लिए मात्र एक साल का मापदंड फिक्स करने के फैसले पर सियासत भी शुरू हो गई है। बीजेपी को छोड़कर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस फैसले का विरोध किया है। पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की वोटर लिस्ट में 25 लाख नए वोटरों को जोड़ने की कवायद कर रही है। जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने लिखा कि पार्टी सरकार के इस कदम का विरोध करती है। बयान में आगे कहा गया है कि बीजेपी चुनावों से डरती है और जानती है कि वह बुरी तरह हार जाएगी।