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क्या COVID-19 को लेकर बनी विपक्षी एकता, BJP के खिलाफ ले पाएगी एक विपक्षी गठबंधन का रूप !

सारे विपक्षी दल एक सुर में बीजेपी सरकार के कोरोना की दूसरी लहर से निपटने को तरीकों का विरोध करते नजर आ रहे हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 21, 2021 पर 8:45 AM
क्या COVID-19 को लेकर बनी विपक्षी एकता, BJP के खिलाफ ले पाएगी एक विपक्षी गठबंधन का रूप !

SUJATA ANANDAN

केंद्र की BJP नेतृत्व वाली सरकार एंटी -बीजेपी विपक्षी दलों की एकता से नर्वस नजर आ रही है, चाहे ये एकता कोरोना की वजह से ही क्यों न बनी हो। आइए ये जानने की कोशिश करते हैं कि क्या ये एकता आगे आने वाले महीनो में बीजेपी के खिलाफ किसी बड़े विपक्षी गठबंधन में बदल सकती है कि नहीं।

बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अभी तक COVID-19 के मोर्चे पर पूर्व  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की आलोचनाओं का ही सामना करना पड़ रहा था। अब बीजेपी क्षेत्रीय दलों के निशाने पर भी आ गई है।

13 विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार की कोविड-19 के दूसरी लहर से निपटने के तरीकों की आलोचना करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें तीन गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री(पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ) शामिल हैं। कांग्रेस की अंतरिम प्रेसीडेंट सोनिया गांधी को इसका जवाब देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने COVID-19 प्रबंधन में महाराष्ट्र सरकार की कमियां गिनाते हुए विपक्ष के सावालों की इतिश्री कर दी।

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परेशानी ये है कि महाराष्ट्र में तीन अलग-अलग विचार धाराओं की पार्टियों के गठबंधन की सरकार चल रही है और अभी तक राज्य में ये कई टेस्ट भी पास कर चुकी है। अब बीजेपी को इस बात का डर सता रहा है कि अगर ये प्रयोग सफल रहा तो ये पूरे देश में कई दूसरे राज्यों में भी इसी तरह तरह के बीजेपी विरोधी गठबंधनों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है। इसके अलावा इससे प्रोत्साहित होकर एनडीए गठबंधन में शामिल असंतुष्ट दल गठबंधन से बाहर आ सकते हैं।
 
इस विपक्षी एकता की सबसे बड़ी कमजोरी ये है कि इस COVID-19 लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले सभी हस्ताक्षरकर्ता रीजनल लेवल पर कांग्रेस के विरोधी हैं। हालांकि महाराष्ट्र महविकास अघाड़ी प्रयोग और कर्नाटक में पहले फेल हो चुका कांग्रेस-जनता दल सेक्यूलर एक्सपेरीमेंट इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस नेतृत्व खास कर राहुल गांधी को बीजेपी को हराने के कॉमन लक्ष्य में क्षेत्रीय दलों के सपोर्टिंग फोर्स के रूप में काम करना होगा।

कांग्रेस में तमाम लोगों का मानना है कि बंगाल में टीएमसी की जोरदार जीत एक गेम प्लान का हिस्सा थी जिसके तहत कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ आधे मन से गठबंधन किया अपने अधिकांश वोट को टीएमसी के पक्ष में मोड़ दिया है। हालांकि इस कोशिश में वह खुद खाली हाथ रह गई।

गौरतलब है कि स्टेट लेवल पर कांग्रेस जहां बीजेपी का समना नहीं कर पाती वहीं, बीजीपी राज्यों में क्षेत्रीय दलों के मुकाबले में नहीं ठहर पाती। इस स्थिति में बीजेपी के लिए डर ये है कि कोविड -19 की दूसरी लहर के रूप में आई ये नेशनल मेडिकल इमरजेंसी बीजेपी के खिलाफ विपक्षियों का एक मजबूत गठबंधन बनाने का रास्ता तैयार कर सकती है।

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