गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी (Jignesh Mevani) को मेसहाणा की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बगैर अनुमति के आजादी रैली निकालने के 5 साल पुराने में दोषी ठहराते हुए 3 महीने कैद की सजा सुनाई है। जिग्नेश सहित कुल 10 लोगों को अदालत ने सजा सुनाई है।
कोर्ट ने इस मामले में जिग्नेश सहित 12 लोगों को बिना इजाजत आजादी कूच रैली करने के आरोप में दोषी पाया है। इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई है, जबकि एक अभी भी फरार है। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे ए परमार ने जिग्नेश मेवाणी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की पदाधिकारी रेशमा पटेल और मेवाणी के राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के कुछ सदस्यों सहित 10 लोगों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143 के तहत गैरकानूनी जनसमूह का हिस्सा बनने का दोषी पाया।
मेहसाणा ‘A’ डिवीजन पुलिस ने साल 2017 के जुलाई महीने में मेहसाणा से बनासकांठा जिले के धनेरा तक बगैर अनुमति के ‘आजादी रैली’ निकालने के लिए IPC की धारा 143 के तहत FIR दर्ज की थी। रेशमा पटेल ने जब इस रैली में हिस्सा लिया था, तब वह किसी राजनीतिक दल की सदस्य नहीं थीं।
वह पाटीदार समाज को आरक्षण दिए जाने की समर्थक रही हैं और बतौर कार्यकर्ता उन्होंने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
बिना अनुमति के रैली करना अपराध
मजिस्ट्रेट जे ए परमार की अदालत ने इस संबंध में फैसला देते हुए कहा कि रैली करना अपराध नहीं है, लेकिन बिना अनुमति के रैली करना अपराध है। अदालत ने कहा कि आरोपी कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश को बड़े अधिकारियों के समक्ष चुनौती दे सकते थे और फिर उचित अनुमति मिलने के बाद रैली कर सकते थे।
बता दें कि जिग्नेश अभी कुछ दिनों पहले ही जेल से छूटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक आपत्तिजनक ट्वीट करने के मामले में असम पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। जेल से छूटने के बाद उन्होंने कांग्रेस के दिल्ली दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि PMO के निशाने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।