सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. रामास्वामी के खिलाफ संसद में पेश महाभियोग प्रस्ताव गिर गया था। उस कारण न्यायपालिका में सुधार की गति धीमी पड़ गयी। पी.वी. नरसिंहराव के कार्य काल में सन 1993 में महाभियोग आया था। कांग्रेस का तब यह अघोषित तर्क था कि महाभियोग प्रस्ताव पास करने से दक्षिण भारतीय मतदातागण कांग्रेस से नाराज हो जाएंगे। अनेक लोगों का यह मानना था कि यदि प्रस्ताव के जरिए रामास्वामी पद से हटाए गए होते तो न्यायपालिका के विवादास्पद तत्वों में भय पैदा होता। इसका प्रभाव अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ा।
