असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने गुरुवार को राज्य में शिक्षा को बदलने की अपनी योजनाओं का खुलासा किया। कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि उन्होंने 600 मदरसों को बंद कर दिया है और राज्य के सभी मदरसों को बंद करने की कोशिश करूंगा। उन्होंने कहा कि हम मदरसे नहीं चाहते हैं। हम स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी चाहते हैं। जनवरी 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, असम में करीब 3,000 रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड मदरसे हैं। अवैध अप्रवासियों को लेकर सीएम ने दावा किया कि बांग्लादेशी लोग असम आते हैं और संस्कृति और सभ्यता के लिए खतरा बनते हैं।
सीएम सरमा ने यह भी कहा कि न्यू इंडिया में मदरसों की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें इस दिशा में आगे बढ़ना है। हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को बदलना है। अब समय आ गया है कि हमारे इतिहास को एक नए तरीके से फिर से लिखा जाए, क्योंकि इसे पहले तोड़ा-मरोड़ा गया था।
सीएम ने अपने भाषण में कहा, "मैंने 600 मदरसों को बंद कर दिया है और मेरा इरादा सभी मदरसों को बंद करने का है। क्योंकि हम मदरसे नहीं चाहते हैं। हम स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सीट चाहते हैं। बांग्लादेशी लोग असम आते हैं और संस्कृति और सभ्यता के लिए खतरा बनते हैं।"
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह राज्य और देश की सेवा के लिए डॉक्टरों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों को तैयार करने के लिए सभी मदरसों को मुख्यधारा के शैक्षणिक संस्थानों से बदलना चाहते हैं। सरमा ने कहा कि मैं असम से आता हूं, जहां रोजाना लोग बांग्लादेश से आते हैं। हमारी संस्कृति और परंपराओं के लिए खतरा है।
2020 में सीएम ने लाया था कानून
साल 2020 में हिमंता बिस्वा सरमा एक कानून लाए थे, जिसके जरिए असम सरकार द्वारा सभी संचालित मदरसों को 'नियमित स्कूलों' में तब्दील किया जाएगा। सीएम का कहना था कि राज्य पुलिस मदरसों में 'अच्छा वातावरण' बनाने के उद्देश्य से बंगाली मुसलमानों के साथ मिलकर काम कर रही है, जिनका रवैया शिक्षा को लेकर सकारात्मक है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, विज्ञान तथा गणित (Science and Mathematics) भी विषयों के तौर पर मदरसों में पढ़ाए जाएंगे। मुस्लिम छात्रों को शिक्षा के अधिकार का सम्मान किया जाएगा। साथ ही टीचरों का डेटाबेस बनाकर रखा जाएगा।