पंजाब की राजनीति में एक नए खिलाड़ी की एंट्री हो गई, जिसका नाम है- शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे)। इस नए दल का नेतृत्व खालिस्तानी समर्थक नेता और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह कर रहे हैं। आज मुक्तसर में माघी मेले में इसकी औपचारिक घोषणा की गई। पार्टी का लक्ष्य पंथिक क्षेत्र पर कब्जा करना है, जिस पर कभी शिरोमणि अकाली दल (SD) का दबदबा था, जो अब अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है।
अमृतपाल सिंह फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत असम के डिब्रूगढ़ की सेंट्रल जेल में बंद हैं, जबकि उनके पिता तरसेम सिंह ने मुक्तसर में पहली राजनीतिक कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। इस मौके पर फरीदकोट से सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों में से एक बेअंत सिंह के सबसे बड़े बेटे सरबजीत सिंह खालसा भी मौजूद रहे।
पार्टी चलाने के लिए पांच सदस्यों की समिति
नया अध्यक्ष चुने जाने तक पार्टी चलाने के लिए पांच सदस्यों की समिति बनाई गई है। इसके सदस्य हैं- तरसेम सिंह, सरबजीत खालसा, अमरदीप सिंह, हरभजन सिंह और सुरजीत सिंह।
यह समिति अगले तीन महीने के भीतर केंद्रीय समिति के लिए चुनाव कराएगी और 13 अप्रैल को पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। यह पार्टी के लिए रूपरेखा भी तैयार करेगी।
पार्टी ने शहीदों, किसानों, मजदूरों और मजदूर वर्ग के परिवारों को सहायता देने की भी योजना बनाई है और दुनिया भर में सिखों और दूसरे लोगों को समर्थन देने का वादा किया है।
अमृतपाल सिंह होंगे अध्यक्ष: तरसेम सिंह
अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने घोषणा करते हुए कहा कि अमृतपाल सिंह अध्यक्ष के रूप में काम करेंगे और उन्होंने आज से पार्टी के लिए सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, "आइए हम पंजाब को बचाने और पंथ (समुदाय) की रक्षा के लिए एक साथ आएं। कोई भी व्यक्ति फॉर्म भरकर पार्टी में शामिल हो सकता है और सदस्य बन सकता है।"
उन्होंने बताया कि पार्टी ने चुनाव आयोग को तीन नाम भेजे थे, जिनमें से इस नाम को मंजूरी दे दी गई है।
SGPC का चुनाव लड़ेगी नई पार्टी
राजनीतिक सम्मेलन में पढ़े गए घोषणापत्र में कहा गया, "यह पार्टी पंजाब में एक नई राजनीतिक ताकत की तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई गई है, जिसकी आवश्यकता दृढ़ता से महसूस की गई है। वर्तमान में पंजाब गंभीर संकटों से जूझ रहा है।"
इसमें आगे कहा गया, "राज्य की जनता खासकर युवा वर्ग नशे की लत, बेरोजगारी, खराब शिक्षा, भ्रष्टाचार, नैतिक पतन, जल और वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य देखभाल की कमी और दूसरे संकटों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।"
नई पार्टी विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी।