झारखंड (Jharkhand) के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ती मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को 5 दिन की प्रवर्तन निदेशालय हिरासत में भेजा गया। उन्हें 31 जनवरी को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट (SC) ने धन शोधन मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।
जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने सोरेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी से राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने को कहा।
अपनी गिरफ्तारी की आशंका के कारण झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नेता हेमंत सोरेन ने शीर्ष अदालत के सामने अपनी याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर उन्हें “सुनियोजित साजिश” के तहत गिरफ्तार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने याचिका में कहा था कि अब से कुछ महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Elections 2024) से पहले केंद्र के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिका में सोरेन ने उनकी गिरफ्तारी को अनुचित, मनमाना और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन घोषित करने का आग्रह किया था। इससे पहले चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को तीन जजों की एक स्पेशल बेंच बनाई थी।
सोरेन को 31 जनवरी को भूखंड के “अवैध” कब्जे और “भूमि माफिया” के साथ कथित संबंध से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था।
गुरुवार को हेमंत सोरेन की याचिका दायर करते हुए, उनके वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि मनी लॉन्ड्रिंग के सेक्शन 19 के प्रावधानों को आपको तय करना होगा। आखिर ऐसे कैसे किसी को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
रांची की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें बृहस्पतिवार को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। हालांकि, अब उन्हें पांच दिन की हिरासत में भेज दिया है।