MUDA Scam Case Against CM Siddaramaiah: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार (15 जनवरी) को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाला मामले में लोकायुक्त जांच पर लगी रोक हटा ली। कोर्ट ने लोकायुक्त से अपनी जांच जारी रखने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने लोकायुक्त से 27 जनवरी तक रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने लोकायुक्त से कहा कि वह अब तक एकत्र किए गए सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा कराएं। कोर्ट ने लोकायुक्त को मामले से संबंधित सभी मौजूदा रिकॉर्ड और फाइलें 16 जनवरी तक हाई कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया।
अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक प्राधिकरण को आज तक की गई जांच का ब्यौरा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत की यह टिप्पणी कथित घोटाले की जांच को सीबीआई को सौंपने के निर्देश की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जो वर्तमान में लोकायुक्त पुलिस द्वारा की जा रही है। यह तब हुआ जब पिछले साल दिसंबर में उच्च न्यायालय ने सिद्धारमैया और उनके परिवार, जिसमें उनकी पत्नी और साले भी शामिल हैं, के खिलाफ मुडा घोटाला मामले में लोकायुक्त की रिपोर्ट दाखिल करने को स्थगित कर दिया था।
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा, "लोकायुक्त आज तक की गई जांच का ब्यौरा दर्ज करेंगे। लोकायुक्त द्वारा जांच जारी रहेगी। जांच की निगरानी लोकायुक्त के पुलिस महानिरीक्षक करेंगे। अगली तारीख को यदि कोई रिपोर्ट दाखिल की जाती है तो उसे लोकायुक्त द्वारा देखा जाएगा। रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख से एक दिन पहले दाखिल की जाएगी। अगली तारीख तक याचिका पूरी कर ली जाएगी।"
जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा, "आप (लोकायुक्त) अपनी जांच फिर से शुरू करें और अपनी अंतिम रिपोर्ट या जो कुछ भी आपने तब तक किया है, उसे अगली सुनवाई की तारीख पर जमा करें। लेकिन कल तक, आप 19 दिसंबर, 2024 से अब तक एकत्र की गई सभी जानकारी जमा करें।" हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई की तारीख तक अपनी आपत्तियां जमा करने का भी निर्देश दिया है।
सीबीआई जांच पर 27 जनवरी को सुनवाई
हाई कोर्ट ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) घोटाला मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को 27 जनवरी तक स्थगित कर दी। कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की एमयूडीए भूखंड आवंटन घोटाले की सीबीआई जांच के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने वाले जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने लोकायुक्त को 27 जनवरी तक जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तरफ से वरिष्ठ वकील रविवर्मा कुमार, अभिषेक मनु सिंघवी ने तथा याचिकाकर्ता की तरफ से मनिंदर सिंह ने पैरवी की। जिरह के दौरान सिंह ने आरोप लगाया कि एमयूडीए से मूल फाइलें गायब हैं। पीटीआई के मुताबिक अदालत ने कहा, "हम हर मुद्दे का निपटान करेंगे, लेकिन पहले लोकायुक्त को अब तक रिकॉर्ड में मौजूद हर चीज का ब्योरा देना होगा। अब तक की गई जांच का पूरा ब्योरा देना होगा।"अंत में अदालत ने लोकायुक्त को 27 जनवरी तक जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।
आरोप हैं कि सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को मैसुरू में प्रतिपूरक भूखंड आवंटित किया गया था जिसका संपत्ति मूल्य उनकी उस भूमि की तुलना में अधिक था जिसे एमयूडीए ने अधिग्रहीत किया था। एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे।
कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धारमैया, पार्वती, उनके रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कृष्णा की शिकायत पर कथित घोटाले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने कथित घोटाले में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।