Language Row: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने सोमवार (10 मार्च) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह खुद को राजा समझकर 'अहंकार' में बात करते हैं। उन्होंने प्रधान से अपनी जुबान पर नियंत्रण रखने को भी कहा। स्टालिन ने स्पष्ट रूप से कहा कि तमिलनाडु सरकार केंद्र की 'पीएम श्री' योजना को लागू करने के लिए आगे नहीं आई है। सीएम ने कहा कि जब ऐसा है तो कोई भी उन्हें इसके लिए राजी नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटॉर्म X पर जारी एक पोस्ट में कहा, "बस यह बताइए कि क्या आप वह कोष जारी कर सकते हैं या नहीं, जो हमसे एकत्र किया गया था और जो तमिलनाडु के छात्रों के लिए है।" प्रधान ने स्टालिन को पत्र लिखकर तमिलनाडु द्वारा नई शिक्षा नीति, तीन भाषा नीति और 'प्रधानमंत्री श्'री को लेकर हुए समझौता ज्ञापन को अस्वीकार करने की बात की थी।
इसका संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार लोगों के विचारों का सम्मान करते हुए काम करती है। जबकि बीजेपी नेता नागपुर से आए आदेश से बंधे रहते हैं। उन्होंने DMK सांसदों को निशाना बनाने के लिए प्रधान की आलोचना की। साथ ही कहा कि केंद्रीय मंत्री ने धनराशि जारी न करके तमिलनाडु को धोखा दिया है।
स्टालिन ने सवाल किया, "आप तमिलनाडु के लोगों का अपमान कर रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे स्वीकार करते हैं?" इससे पहले, DMK सदस्यों द्वारा प्रधान की इस टिप्पणी पर विरोध जताए जाने के बाद लोकसभा की कार्यवाही लगभग 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई थी। प्रधान ने तमिलनाडु सरकार पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना के कार्यान्वयन के मुद्दे पर 'बेईमान' होने का आरोप लगाया था।
प्रधान ने बयान से एक शब्द वापस लिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को लोकसभा में DMK सदस्यों के विरोध के बाद अपने वक्तव्य से एक शब्द वापस ले लिया। साथ ही आसन ने भी इस शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। सदन में प्रश्नकाल के दौरान प्रधान ने DMK सांसद टी सुमति के पूरक सवाल के जवाब में एक टिप्पणी की थी। सुमति ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को स्वीकार नहीं करने के कारण तमिलनाडु को पीएमश्री योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले 2,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि अन्य राज्यों को ट्रांसफर कर दी गई है।
इसके जवाब में शिक्षा मंत्री प्रधान ने द्रमुक पर तमिलनाडु में छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। मंत्री के बयान को लेकर डीएमके सदस्यों ने विरोध किया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुबह करीब 11.30 बजे दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही 12 बजे फिर से शुरू होने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने DMK सदस्य कनिमोझि को अपनी बात रखने के लिए कहा।
कनिमोझि ने कहा कि वह दुखी हैं कि केंद्रीय मंत्री ने तमिलनाडु के सांसदों, वहां की सरकार और राज्य के लोगों के बारे में इस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि तीन भाषाओं की नीति तमिलनाडु को स्वीकार्य नहीं है। पीटीआई के मुताबिक इस पर प्रधान ने कहा, "मेरी प्रिय बहन ने जो कहा है, उसके बारे में मैं कहना चाहता हूं कि अगर मेरे शब्द से कोई आहत हुआ है तो मैं इस शब्द को वापस लेता हूं।"
इसके बाद बिरला ने कहा, "मैंने इस शब्द को रिकॉर्ड से निकाल दिया है।" बाद में DMK सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। सदन में टोका-टोकी के बीच ही डीएमके सांसद दयानिधि ने कुछ टिप्पणी की, जिस पर बिरला ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि आप सदन में बोलते हुए ऐसी टिप्पणी करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।