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Lok Sabha Elections 2024: इत्र की नगरी कन्नौज में किसे मिलेगी जीत की महक, उम्मीदवार को लेकर कश्मकश में सपा, फिर बाजी मार लेगी BJP?

अब इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन यह सीट भी मुलायम परिवार के लिए काफी मजबूत रही है। क्या होगा इस लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में? राजनीतिक समीकरण क्या बनेंगे, क्या बिगड़ेंगे? इन सब सवालों के बीच फिलहाल चुनाव की गोटियां बिछाई जा रही हैं। अब कौन लड़ेगा इस क्षेत्र से? क्या अखिलेश खुद कन्नौज से उतरेंगे? यह समय के गर्त में है। समाजवादी पार्टी इस सीट पर अपने पत्ते खोल नहीं रही है

Brijesh Shuklaअपडेटेड Mar 01, 2024 पर 6:15 AM
Lok Sabha Elections 2024: इत्र की नगरी कन्नौज में किसे मिलेगी जीत की महक, उम्मीदवार को लेकर कश्मकश में सपा, फिर बाजी मार लेगी BJP?
Lok Sabha Elections 2024: इत्र की नगरी कन्नौज में किसे मिलेगी जीत की महक

Lok Sabha Elections 2024: कन्नौज (Kannauj) की गलियों में घूमते हुए कबीर की कुछ पंक्तियां याद आती हैं- 'कबिरा संगत साधु की, ज्यों गंधी की बास। जो कछु गंधी दे नहिं, तो भी बास सुबास।।' यानी जिस तरह साधु का साथ जीवन को कुछ न कुछ देता है, इसी तरह इत्र अगर कहीं है, तो इत्र मिले न मिले लेकिन उसकी सुगंध का आनंद जरूर मिलता है। इत्र की नगरी कन्नौज। इत्र की खुशबू से यहां की गालियां भी महकती हैं। 2000 से भी ज्यादा इकाइयां यहां इत्र बनाने का काम कर रही हैं, जो दुनिया भर में जाता है। यही नहीं इसी नगर से जो ब्राह्मण निकले वो कान्यकुब्ज ब्राह्मण कहलाए। यहां की बुकनू भोजन का स्वाद ही बदल देती है। कन्नौज कभी बड़े-बड़े साम्राज्यों की राजधानी थी। अंतिम हिंदू वादी शासक हर्षवर्धन ने यहां पर 606 से 647 ईस्वी तक शासन किया।

वह हर 12 साल में प्रयागराज के महाकुंभ में जाते थे और अपना सब कुछ दान कर आते थे। संस्कृत के प्रसिद्ध कवि बाणभट्ट ने हर्षवर्धन के जीवन चरित्र का वर्णन किया है। जयचंद यहीं के शासक थे, जिनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने पृथ्वी राज चौहान के साथ विश्वासघात किया। यह अलग बात है कि कन्नौज के इतिहासकार कहते हैं कि जयचंद ने कोई दगाबाजी नहीं की। गलत इतिहास बताया जा रहा है।

बौद्ध चीनी यात्री हेवनसांग ने कन्नौज नगर का जो वर्णन किया है, वो भी अद्वितीय है। बहुत ही खूबसूरत था कन्नौज। कन्नौज शुरू से राजनीति का केंद्र रहा है और एक बार फिर यहां पर चुनाव का डंका बजने जा रहा है। 1967 में इसी धरती पर प्रसिद्ध समाजवादी डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित कर दिया था।

अब इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन यह सीट भी मुलायम परिवार के लिए काफी मजबूत रही है। क्या होगा इस लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में? राजनीतिक समीकरण क्या बनेंगे, क्या बिगड़ेंगे? इन सब सवालों के बीच फिलहाल चुनाव की गोटियां बिछाई जा रही हैं।

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