Lok Sabha Elections 2024: कन्नौज (Kannauj) की गलियों में घूमते हुए कबीर की कुछ पंक्तियां याद आती हैं- 'कबिरा संगत साधु की, ज्यों गंधी की बास। जो कछु गंधी दे नहिं, तो भी बास सुबास।।' यानी जिस तरह साधु का साथ जीवन को कुछ न कुछ देता है, इसी तरह इत्र अगर कहीं है, तो इत्र मिले न मिले लेकिन उसकी सुगंध का आनंद जरूर मिलता है। इत्र की नगरी कन्नौज। इत्र की खुशबू से यहां की गालियां भी महकती हैं। 2000 से भी ज्यादा इकाइयां यहां इत्र बनाने का काम कर रही हैं, जो दुनिया भर में जाता है। यही नहीं इसी नगर से जो ब्राह्मण निकले वो कान्यकुब्ज ब्राह्मण कहलाए। यहां की बुकनू भोजन का स्वाद ही बदल देती है। कन्नौज कभी बड़े-बड़े साम्राज्यों की राजधानी थी। अंतिम हिंदू वादी शासक हर्षवर्धन ने यहां पर 606 से 647 ईस्वी तक शासन किया।
