...तो क्या उद्धव की 'एक गलती' से एकनाथ शिंदे को आज मिली राहत, SC ने महाराष्ट्र में यथास्थिति बहाल करने से किया इनकार
Maharashtra Political Crisis: अदालत ने ये जरूर कहा कि राज्यपाल के काम कानून के शासन के अनुसार नहीं थे। CJI डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस कृष्ण मुरारी, एमआर शाह, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हन की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाया। फैसला सुनाते हुए CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली SC बेंच ने कहा कि राज्यपाल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए MVA सरकार को बुलाना सही नहीं था
MoneyControl News
अपडेटेड May 11, 2023 पर 1:39 PM
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (FILE PHOTO)
Maharashtra Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को झटका देते हुए महाराष्ट्र (Maharashtra) में यथास्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने ये जरूर कहा कि राज्यपाल के काम कानून के शासन के अनुसार नहीं थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस कृष्ण मुरारी, एमआर शाह, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हन की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाया।
फैसला सुनाते हुए CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली SC बेंच ने कहा कि राज्यपाल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए MVA सरकार को बुलाना सही नहीं था। CJI ने कहा, "राज्यपाल के काम कानून के शासन के अनुसार नहीं थे।"
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे का इस्तीफा एक गलती थी। CJI की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि अगर ठाकरे ने इस्तीफा नहीं दिया होता, तो अदालत यथास्थिति बहाल कर देती। पीठ ने कहा, "ठाकरे के इस्तीफा देने के बाद से यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के फैसले में फ्लोर टेस्ट की जरूरत के सही तर्कों की कमी थी। क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट में नहीं लिया था, इसलिए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि यथास्थिति बहाल करना संभव नहीं है।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के राज्यपाल के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि राज्यपाल इस संबंध में अपने कार्यों में न्यायसंगत थे।
अयोग्यता की कार्यवाही को संबोधित करते हुए, शीर्ष अदालत ने साफ किया कि उसे ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं मिली, जिसमें ऐसे मामलों का फैसला करने में अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत लगती हो। इसके बजाय, अदालत ने स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने को कहा।
कैसे शुरू हुआ था महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट?
पिछले जून में, एकनाथ शिंदे और 39 विधायकों ने शिवसेना के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जिसके बाद पार्टी का विभाजन हुआ और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई। MVA में NCP और कांग्रेस भी शामिल थीं। शिंदे ने बाद में BJP के साथ गठबंधन किया और मुख्यमंत्री का पद संभाला।
दरअसल जून 2022 में, एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों के एक गुट ने कांग्रेस और NCP के साथ गठबंधन करने के उनके फैसले के कारण सीएम उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह किया। विद्रोही गुट इस गठबंधन को पार्टी की हिंदुत्व विचारधारा के खिलाफ मानता था।
शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के बागी विधायकों को डिप्टी स्पीकर ने अयोग्यता नोटिस भेज दिया। दूसरी ओर उम्मीद ये लगाई जा रही थी कि बागी विधायक BJP की समर्थन से राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
इसके बाद, शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि वो ये फैसला करे कि क्या विद्रोहियों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए या नहीं। 27 जून को, शीर्ष अदालत ने अयोग्यता नोटिसों का जवाब दाखिल करने के लिए समय का विस्तार देकर शिंदे को अंतरिम राहत दी।
29 जून को, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल की तरफ से बुलाए गए फ्लोर टेस्ट के लिए हरी झंडी दे दी।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट लेने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के निर्देश पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद, उद्धव ठाकरे ने 30 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से अपने इस्तीफे की घोषणा की।