महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट (Maharashtra Political Crisis) पर सुप्रीम कोर्ट (SC) के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों से भी कई प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इस बीच शिवसेना (UBT) के संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत ने ये माना है कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) गुट के सुनील प्रभु आधिकारिक व्हिप बने हुए हैं, तो इसके अनुसार, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (EKnath Shinde) समेत सभी 16 बागी विधायक अयोग्य घोषित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर राहुल नार्वेकर आधिकारिक व्हिप का पालन नहीं कर सकते। राउत ने ये भी कहा कि क्योंकि ये सरकार अवैध तरीके से बनी है, इसलिए शिंदे सरकार अवैध है। राउत ने कहा, "सुनील प्रभु SC की टिप्पणियों के अनुसार शिवसेना के आधिकारिक व्हिप बने हुए हैं, इसलिए बागी विधायक अयोग्य हैं।"
दूसरी तरफ शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने पिछले साल जिस तरह नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, उसी तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
मेरी तरह ही इस्तीफा दें शिंदे और फडणवीस- उद्धव
राज्य में पिछले साल शिवसेना केंद्रित राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें, ठाकरे ने उन्हें फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाने को लेकर तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की आलोचना की।
ठाकरे ने कहा, "मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए जैसा मैंने किया था।"
ठाकरे ने कहा कि 16 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने पर फैसला करते समय विधानसभा अध्यक्ष राहुल नारवेकर को सुनील प्रभु को उनकी शिवसेना का व्हिप मानना ही होगा।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की तरफ से पिछले साल 30 जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहना सही नहीं था। हालांकि, न्यायालय ने पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार करते हुए कहा कि ठाकरे ने शक्ति परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।
महाराष्ट्र में पिछले साल शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी। राजनीतिक संकट से जुड़ी दोनों गुटों की अलग-अलग याचिकाओं पर पांच जजों की संविधान बेंच ने अपने फैसले में सर्वसम्मति से कहा कि शिंदे गुट के भरत गोगावाले को शिवसेना का व्हिप नियुक्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ‘अवैध’ था।
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "उद्धव ठाकरे ने विश्वास मत का सामना किए बिना ही इस्तीफा दे दिया था। इसलिए राज्यपाल ने सदन में सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कहने पर सरकार बनाने के लिए शिंदे को आमंत्रित करके सही किया।" बेंच में जस्टिस एम आर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे।