मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका! याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग

सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कुमार ने आबकारी नीति मामलों में जमानत याचिकाओं पर नए सिरे से विचार करने वाली आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। जस्टिस कुमार के अलग होने के बाद, शीर्ष अदालत अब इस मामले पर 15 जुलाई को सुनवाई करेगी

अपडेटेड Jul 11, 2024 पर 2:41 PM
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मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका! याचिका पर सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग

आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है और उन्हें जमानत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हुआ ये कि सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कुमार ने सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। आबकारी नीति मामलों में जमानत याचिकाओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए सिसोदिया की तरफ से ये याचिका दायर की गई थी।

Live Law के मुताबिक, जस्टिस संजय कुमार ने याचिका की सुनवाई से खुद को अलग करने के पीछे कुछ निजी कारण का हवाला दिया है। सिसोदिया की जमानत याचिका शराब नीति मामले में उनके खिलाफ दर्ज मनीलॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़ी है।

15 जुलाई होगी सिसोदिया की याचिका पर सुनवाई


जस्टिस संजीव खन्ना, संजय करोल और संजय कुमार की तीन जजों की बेंच आज इस मामले की सुनवाई करने वाली थी। हालांकि, जस्टिस कुमार के अलग होने के बाद, शीर्ष अदालत अब इस मामले पर 15 जुलाई को सुनवाई करेगी।

इससे पहले 4 जून को, सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेने के बाद सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। तब SG ने कहा था कि शराब नीति मामले में चार्जशीट/अभियोजन शिकायत 3 जुलाई 2024 को या उससे पहले दायर की जाएगी।

साथ ही, अदालत ने अंतिम शिकायत या आरोपपत्र दायर होने के बाद सिसोदिया को जमानत के लिए अपनी याचिकाएं फिर से लगाने की भी छूट दी।

सुप्रीम कोर्ट में सिसोदिया का पक्ष

इस हफ्ते की शुरुआत में, सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने के लिए सिसोदिया के आवेदन का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिसोदिया 16 महीने से जेल में हैं और मुकदमा खत्म होना चाहिए। इसके बाद ये मामला आज तीन जजों की बेंच के सामने लिस्टेड किया गया।

आज की सुनवाई की शुरुआत में ही जस्टिस खन्ना ने सिंघवी को बताया, "मेरे भाई व्यक्तिगत कारणों से मामले की सुनवाई नहीं करना चाहेगे।" इसके बाद सिंघवी ने इस बात पर जोर दिया कि मामला बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुकदमा अभी तक शुरू नहीं हुआ है और उन्होंने सबसे कम तारीख का अनुरोध किया।

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