आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को दिल्ली आबकारी नीति मामले (Delhi Excise Policy Case) में अंतरिम राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने उन्हें 3 जून यानी शनिवार को हिरासत में रहते हुए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी बीमार पत्नी से घर पर मिलने की अनुमति दे दी है। साथ ही हाई कोर्ट दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम की पत्नी का मेडिकल रिकॉर्ड भी मांगा है। यानी अब मनीष सिसोदिया कल अपने घर जा सकेंगे, लेकिन इस दौरान दिल्ली पुलिस उनके साथ मौजूद रहेगी।
बार एंड बेंच के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को शनिवार सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच पत्नी से मिलने की अनुमति दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस दौरान वह मीडिया से बातचीत, मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें पत्नी और अपने परिवार के सदस्यों के अलावा किसी से नहीं मिलने का भी आदेश दिया गया है। बता दें कि सिसोदिया की पत्नी मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित हैं।
इस दौरान ED ने सिसोदिया को अंतरिम जमानत देने का विरोध किया। असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि मंत्री के रूप में उन्होंने 18 विभाग संभाले, तब तो उनके पास अपनी पत्नी से मिलने का समय नहीं था। वे केवल जमानत के लिए ये बातें बना रहे हैं। चार दिन पहले उन्होंने याचिका वापस ले ली थी। अब वे फिर से आ गए हैं। उनकी पत्नी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल कॉस्मेटिक बदलाव हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि सिसोदिया केवल पुलिस की मौजूदगी में ही अपनी पत्नी से मिल सकते हैं।
क्या है सिसोदिया पर आरोप?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सिसोदिया को 9 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था जहां वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 51 वर्षीय आम आदमी पार्टी के नेता को सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने गिरफ्तार किया था, जो आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने नए चार्जशीट में कहा है कि दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 को आम आदमी पार्टी नेतृत्व विशेष रूप से पूर्व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया 'अवैध धन का लगातार सृजन करने के लिए लाए थे।' अब इस दिल्ली आबकारी नीति को रद्द किया जा चुका है।
एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग एजेंसी ने दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया पर मामले में शामिल एक अभियुक्त से 'रिश्वत' प्राप्त करने का भी आरोप लगाया। साथ ही धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इन्हें 'अपराध से सृजित आय' करार दिया।
चार्जशीट में कहा गया है कि सिसोदिया ने अपराध की आय (2.2 करोड़ रुपये) हासिल की और उसी को छुपाने में शामिल हैं। ED ने सिसोदिया पर जांच को बाधित करने और सबूत मिटाने के लिए डिजिटल सबूतों को नष्ट करने में शामिल होने का भी आरोप लगाया है।