मोहनदास पई
मोहनदास पई
Rishi Sunak का यूनाइटेड किंग्डम (United Kingdom) का प्रधानमंत्री बनना राजनीति की खूबी है। यह नस्लवाद और भेदभाव की पुरानी परंपरा के खिलाफ एक कदम है। ऋषि एक ब्रिटिश इंडियन (British Indian) हैं। पढ़ाई में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन्होंने कंजरवेटिव पार्टी ज्वाइन की, इलेक्शन में पार्टी के लिए काम किया। बतौर फाइनेंस मिनिस्टर उन्होंने तब बहुत अच्छा काम किया, जब ब्रिटेन मुश्किल वक्त से गुजर रहा था। अब वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बन गए हैं।
यह दिखाता है कि यूके की डेमोक्रेसी इतनी मैच्योर हो गई है कि वहां पहला नॉन-व्हाइट पीएम बन गया है। यह उन बदलावों के बारे में भी बताता है जो पिछले कई सालों में ब्रिटेन के समाज में आया है। जहां तक इंडिया का संबंध है तो हम गर्व से कह सकते हैं कि भारतीय मूल का एक व्यक्ति उस देश का पीएम बन गया है, जिसने लंबे समय तक इंडिया पर राज किया था।
इंडिया को फायदा या नुकसान?
लेकिन, हमें खुशियां मनाते वक्त यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि ऋषि सुनक एक ब्रिटिश इंडियन हैं। साफ तौर पर उनकी वफादारी ब्रिटेन के साथ है। वह ब्रिटेन के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे। इंडिया यह उम्मीद नहीं कर सकता और उसे नहीं करना चाहिए कि सुनक इंडिया का पक्ष लेंगे या इंडिया के लिए कुछ असमान्य करेंगे।
वह पहले ही कह चुके हैं कि ब्रिटेन और इंडिया के रिश्ते दो-तरफा होने चाहिए। वह ज्यादा ब्रिटिश कंपनियों की मौजूदगी इंडिया में चाहते हैं। वह ज्यादा ब्रिटिश स्टूडेंट्स इंडिया में चाहते हैं। यह सही है। इंडिया यह उम्मीद कर सकता है कि नस्लवादी सोच वाला ब्रिटिश मीडिया शुरुआती दौर के बाद भारतीय मूल के होने को लेकर सुनक को निशाना बनाएगा। उसकी नजरें इस बात पर होगी कि सुनक का व्यवहार इंडिया के साथ कैसा रहता है।
इसलिए सुनक का व्यवहार कई मामलों में इंडिया को लेकर रुखा हो सकता है। इंडिया को किसी देश से किसी रियायत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। आज बराबरी वाले दो देशों के बीच व्यापार को लेकर चर्चा और एग्रीमेंट हो रहे हैं। इंडिया 3.15 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी बनने के बाद ब्रिटेन को पीछे छोड़ चुका है।
ओल्ड किंग और यंग पीएम
एलिजाबेथ अपने पिता के निधन के बाद जब इंग्लैंड की महारानी बनीं तो विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्री थे। द्वितीय विश्व युद्ध के विनाश के बाद इंग्लैंड को यंग महारानी मिली थीं। चर्चिल बहुत सीनियर लीडर थे, जो साम्राज्यवाद से जुड़ी ब्रिटेन की महानता में विश्वास करते थे। आज हालात बिल्कुल उलट हैं। 42 साल के सुनक पिछले 200 साल में ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के पीएम हैं। प्रिंस चार्ल्स बहुत सीनियर किंग हैं, जो ब्रिटेन से जुड़े कई मसलों पर पीएम को सलाह दे सकते हैं। यह देखना मजेदार होगा कि आज यह व्यवस्था कैसे काम करती है।
इंफोसिस के मूर्ति के साथ सुनक का संबंध
मेरा मानना है कि इंफोसिस में अक्षता मूर्ति की हिस्सेदारी किसी के लिए एक बड़ा मसला है। उनकी इस हिस्सेदारी के बारे में सबको पता चल चुका है। कानून हर व्यक्ति के लिए एक समान है। और उन्होंने कानून का पालन किया है। उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि वह टैक्स चुकाने को तैयार हैं। जहां तक बिजनेस का संबंध है तो मुझे नहीं लगता कि इंफोसिस के साथ इंडिया या ब्रिटेन में किसी तरह का भेदभाव होगा।
सुनक के बारे में
मैं सुनक का सम्मान और तारीफ करता हूं, क्योंकि उनके दिमाग में यह बात स्पष्ट रही है कि वह लोगों की सेवा करना चाहते हैं। बैंकर के रूप में बहुत कामयाब रहने के बाद राजनीति में आना और देश के लोगों के लिए काम करना किसी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा काम है। और उन्होंने यह काम बहुत गंभीरता से किया है। बतौर वित्त मंत्री उनका काम शानदार रहा। मैं दूर से उन्हें देख रहा हूं और वह जो करते हैं उसकी तारीफ करता हूं। मैं उन्हें शुभकामना देता हूं। उनके पास ब्रिटेन का ग्रेट पीएम बनने के लिए अच्छे दिमाग और अच्छा दिल जैसी खूबियां हैं।
मैंने मूर्ति को उनके दामाद के ब्रिटेन का पीएम बनने पर बधाई दी है। लेकिन, जैसा कि मैं उन्हें जानता हूं, वह पीएम सुनक और अपने दमाद के बीच फर्क बनाए रखने की कोशिश करेंगे। ब्रिटेन में नस्लवादी सोच के लोगों के हमलों की वजह से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मुझे लगता है कि अब फिर से कोई ऐसा नहीं करना चाहेगा।
(लेखक इंफोसिस के बोर्ड के एक पूर्व सदस्य हैं। ऋषि सुनक की शादी अक्षता मूर्ति से हुई है, जो इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की बेटी हैं)
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