मारुति सुजुकी ने लिया बड़ा फैसला, अगले साल तक 20% एथेनॉल से चलेंगे सभी वाहन

Maruti Suzuki: देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुज़ुकी कुछ ऐसा करने वाली है। जिससे इंडियन मार्केट में धूम मच जाएगी। खास बात यह है कि सरकार भी इसके पक्ष में है

अपडेटेड Oct 26, 2022 पर 10:09 AM
Story continues below Advertisement
2023 तक कंपनी के सभी वाहन E20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल से तैयार हुए फ्यूल से चलेंगे।

Maruti Suzuki: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से अगर आपकी जेब भारी पड़ रही है तो मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) आपको बड़ी राहत देने के की तैयारी में है। दरअसल, मारुति सुजुकी अब फ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के अलावा नए सिलेंडर वाली गाड़ियां बनाने की तैयारियां कर रही है। देश की नंबर 1 ऑटोमोबाइल कंपनी ने हाल ही में ऐलान किया था कि मारुति सुजुकी साल 2025 में अपना पहला ऑल-इलेक्ट्रिक वाहन पेश करेगी। इसके बाद कंपनी ने कहा है कि अगले साल यानी 2023 तक उसकी सभी वाहनें E20 यानी 20 फीसदी एथेनॉल से तैयार हुए फ्यूल से चलेंगी।

वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road, Transport and Highway) के मुताबिक सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों को अप्रैल 2023 से E20 फ्यूल पर चलने वाले इंजनों पर स्विच करना होगा। केन्द्र सरकार का मानना है कि इससे देश में कार्बन के कारण फैल रहे प्रदूषण में कटौती होगी। साल 2070 तक कार्बन के उत्सर्जन के कारण हो रहे प्रदूषण को शून्य करने में मदद मिलेगी।

क्या है E20 फ्यूल?


E20 फ्यूल ऐसा फ्यूल है, जिसमें पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल की ब्लैंडिंग होती है। पहले 2030 तक 20 फीसदी एथेनॉल ब्लैंडिंग को जरूरी किया गया था। जिसे अब बदलकर 2025 कर दिया गया है। एथेनॉल ब्लैंडिंग से पेट्रोल के प्रदूषण फैलाने की खपत भी कम होती है। यह एक तरह का फ्लेक्स-फ्यूल ही है। मारुति सुजुकी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर (Chief Technical Officer at Maruti Suzuki) सीवी रमन (CV Raman) का कहना है कि साल 2023 तक कंपनी के सभी वाहन E20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल से तैयार हुए फ्यूल से चलेंगे। बता दें कि मौजूदा समय में पेट्रोल में 10-15 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है। अगले साल इसे बढ़ाकर 20-25 फीसदी कर दिया जाएगा।

Ethanol Blending पर जोश में सरकार, 5 महीने पहले हासिल किया 10% का लक्ष्य, 20% के लिए घटाए 5 साल

प्रदूषण में आएगी गिरावट

इसकी वजह से वायु प्रदूषण कम होगा। इसकी वजह ये है कि ऐसे फ्यूल के जलने से निकलने वाले कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा घट जाएगी और फ्यूल इकोनॉमी बढ़ेगी। E20 फ्यूल का इस्तेमाल होने से देश में इंपोर्ट किए जाने वाले फ्यूल का बिल घटेगा।

पुराने इंजनों में होगा मामूली बदलाव

कंपनी के इस कदम से वाहनों के इंजनों में मामूली बदलाव करने की जरूरत होगी। पुराने इंजन अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल फ्यूल के लिहाज से बेहतर नही हैं। ऐसे में E20 फ्यूल के लिए पुराने इंजनों में हल्के-फुल्के बदलाव की जरूरत होगी। सीवी रमन ने आगे कहा कि फ्यूल और रबर होसेस (fuel and rubber hoses) में बदलाव करने की जरुरत पड़ेगी। इसके साथ ही पुराने इंजन को रिकैलिब्रेट (recalibrate) करना होगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।