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'जब भी मैं उस वक्त को याद करता हूं तो सिहर उठता हूं', मृतक BJP विधायक के बेटे ने बताई मुख्तार अंसारी के आतंक की कहानी

Mukhtar Ansari's Death: माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी को गुरुवार को तबीयत बिगड़ने के बाद जेल से बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। इस बीच, मुख्तार अंसारी की मौत के मद्देनजर पूरे यूपी में धारा 144 के लगा दी गई है। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा था

Akhileshअपडेटेड Mar 29, 2024 पर 7:12 PM
'जब भी मैं उस वक्त को याद करता हूं तो सिहर उठता हूं', मृतक BJP विधायक के बेटे ने बताई मुख्तार अंसारी के आतंक की कहानी
Mukhtar Ansari's Death: गाजीपुर जिले में तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर, 2005 को हुई थी

Mukhtar Ansari's Death: नवंबर 2005 की बात है जब बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय (BJP MLA Krishnanand Rai) एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन कर घर लौट रहे थे। जैसे ही वह गाजीपुर के भावरकोल में एक पुल पर पहुंचे बीजेपी नेता के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया और AK-47 राइफलों से लैस हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिसमें राय की मौत हो गई। FIR के अनुसार, गैंगस्टर से राजनेता मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) और उनके भाई अफजल अंसारी को मुख्य साजिशकर्ता थे। गाजीपुर जिले में तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर, 2005 को हुई थी।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में आतंक का पर्याय बने गैंगस्टर-नेता मुख्तार अंसारी की गुरुवार को बांदा के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। अंसारी की मौत के साथ ही अपराध के एक युग और राजनीति के साथ उसके गठजोड़ के एक अध्याय का अंत हो गया। अंसारी के खिलाफ हत्या से लेकर जबरन वसूली तक के 65 मामले दर्ज थे, फिर भी वह विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर पांच बार विधायक चुना गया। साल 1963 में एक प्रभावशाली परिवार में जन्मे अंसारी ने राज्य में पनप रहे सरकारी ठेका माफियाओं में खुद को और अपने गिरोह को स्थापित करने के लिए अपराध की दुनिया में प्रवेश किया।

19 साल बाद बेटे का छलका दर्द

19 साल बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय (Piyush Rai) का कहना है कि मुख्तार अंसारी की मौत सर्वशक्तिमान का फैसला है। CNN-News18 से बात करते हुए पीयूष ने कहा कि राज्य सरकार उन आरोपों पर गौर करेगी कि अंसारी को जेल में जहर दिया गया था, लेकिन "हमें खुशी है कि भगवान ने आखिरकार अपना फैसला सुनाया"। उन्होंने कहा, "उनके दरबार से जो कुछ भी आएगा हमें उसे स्वीकार करना चाहिए। आज मैंने अपनी मां के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए। हमने ईश्वर को उस कठिन दौर से निपटने की शक्ति देने और हमें अंत देने के लिए धन्यवाद दिया। जब हम उस वक्त को याद करते हैं तो सिहर उठते हैं।"

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