Mulayam Singh Yadav Death: आज घरों तक पहुंचता है शहीदों का पार्थिव शव, Sukhoi-30 की डील, बतौर रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के दो बड़े फैसले

Mulayam Singh Yadav Death: 'मुलायम सिंह यादव' ये केवल क्षेत्रीय राजनीति ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ा नाम था। मुलायम संयुक्त मोर्चा सरकार में 1996 और 1998 के बीच रक्षा मंत्री भी रहे थे

अपडेटेड Oct 10, 2022 पर 1:18 PM
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बतौर रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के दो बड़े फैसले

Mulayam Singh yadav Death: समाजवादी पार्टी (SP) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) 82 साल की उम्र में सोमवार को इस दुनिया को अलविदा कह गए। एक शिक्षक, एक पहलवान और आगे चल कर राजनीति में खुद को 'नेताजी' का नाम से स्थापित करने वाले मुलायम सिंह का 50 साल से भी ज्यादा लंबा राजनीतिक करियर रहा है।

मुलायम सिंह यादव 10 बार विधायक और सात बार सांसद रहे हैं। इसके अलावा वे जनसंख्या और राजनीति के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे।

'मुलायम सिंह यादव' ये केवल क्षेत्रीय राजनीति ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ा नाम था। मुलायम संयुक्त मोर्चा सरकार का हिस्सा भी रहे हैं। इस दौरान वह 1996 और 1998 के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं।


मुलायम सिंह यादव के रक्षा मंत्री रहने के दौरान दो ऐसे अहम फैसले लिए गए, जो न केवल आज भी सैन्य शक्ति को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि मानवते के नजरिए से भी अहम थे।

शहीद सैनिकों का पार्थिव शव घर पहुंचाने का फैसला

दरअसल आजादी के बाद से कई सालों तक अगर कोई जवान सीमा पर या किसी युद्ध में शहीद हो जाता था, तो उनका शव उनके घर वालों को नहीं लौटाया जाता था। ऐसे में सिर्फ जवान से जुड़ी उनकी चीजें और उसकी टोपी ही घर वालों को सौंपी जाती थी।

मगर आगे चल कर इस फैसले को बदला गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में ही इस प्रथा को खत्म किया गया और शहीद सैनिकों के शव पूरे सम्मान के साथ उनके परिवारों को सौंपने का निर्णय लिया गया था।

इतना ही नहीं मुलायम सिंह यादव ने ये फैसला भी लिया कि शहीद का पार्थिव शव उनके घर वालों तक पूरे राजकीय सम्मान के साथ पहुंचाया जाएगा। साथी ही जिले के SP और DM शहीद के घर जाएंगे और पूरी सम्मान के साथ शहीद सैनिक का अंतिम संस्कार भी कराया जाएगा। इस फैसले को आज भी एक नजीर के तौर पर माना जाता है।

Sukhoi-30 फाइटर जेट डील

राजनीतिक रूप से, मुलायम सिंह यादव और अटल बिहारी वाजपेयी कड़वे प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। लेकिन जब देश हित की बात आई तो दोनों एक मुद्दे पर राजी हो गए थे। यहां हम बात कर रहे हैं भारतीय वायुसेना के गौरव सुखोई-30 फाइटर जेट (Sukhoi-30 Fighter Jet) की।

1996 में आम चुनाव से पहले और कार्यकाल के आखिरी दिनों में पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने रूस के साथ सुखोई विमान समझौते पर करार किया था। बीजेपी ने इस डील का कड़ा विरोध किया था। BJP ने कहा कि राव सरकार जल्दबाजी में यह सौदा कर रही है।

The Print की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाजपेयी इस डील को लेकर चिंतित थे कि 350 करोड़ डॉलर की राशि बिना अंतिम कीमत तय किए रूस को क्यों दी गई? वाजपेयी ने यह भी कहा कि अगर यह एक अच्छा विमान है, तो घोटाले की निराधार बातों से सौदे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

उधर चुनाव के बाद बीजेपी सत्ता में आई। इससे पहले कि वह सुखोई सौदे पर आगे कुछ करती, 13 दिनों में वाजपेयी सरकार गिर गई। इसके बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि उन्होंने डील से जुड़े दस्तावेज देखे हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। अगर कोई जल्दबाजी दिखाई भी गई, तो वह राष्ट्रहित में ही थी।

Mulayam Singh Yadav: एक बार नहीं, दो बार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे मुलायम सिंह यादव

एच डी देवेगौड़ा वाजपेयी सरकार के पतन के बाद प्रधान मंत्री बने। इस दौरान मुलायम रक्षा मंत्री थे। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के मुताबिक मुलायम सिंह यादव ने एक बैठक में कहा, "जसवंत जी और अटल जी मेरे पास सुखोई डील के लिए आए थे।"

मुलायम सिंह यादव ने कहा, "वाजपेयी जी और जसवंत जी को साउथ ब्लॉक में बुलाकर इसकी पूरी जानकारी दी गई. उन्होंने दस्तावेजों में कुछ बदलाव का सुझाव दिया, जैसे रूस ने गारंटी दी है कि इसमें कोई रिश्वत नहीं दी गई और अगर भविष्य में कुछ भी सामने आया तो भारत सरकार को मुआवजा दिया जाएगा।"

इतनी राजनीतिक खींचतान के बाद आखिरकार भारत ने मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में रूस के साथ इस लड़ाकू विमान की डील फाइनल की थी। मुलायम सिंह यादव हमेशा चीन को पाकिस्तान से बड़ा दुश्मन बताते रहे हैं।

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