Mulayam Singh Yadav: यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार (10 अक्टूबर) सुबह निधन हो गया। किसान परिवार से आए मुलायम ने राजनीति के मैदान में कई दिग्गजों की पटखनी दी थी। करियर की शुरुआत में पहलवान रह चुके यादव ने प्रतिद्वंद्वी को चित करने के हुनर का इस्तेमाल खुलकर राजनीति में किया। लंबे समय तक यूपी की राजनीति में एकछत्र राज करने वाले यादव की महत्वाकांक्षा प्रधानमंत्री बनने की थी।
यादव एक नहीं, दो बार प्रधानमंत्री बनने के काफी करीब पहुंच गए थे। लेकिन, शायद उनकी कुंडली में पीएम बनना नहीं लिखा था। जो लोग प्रधानमंत्री बनने की रेस में मुलायम से आगे निकल गए थे, उनमें से ज्यादातर आज देश की राजनीति से ओझल हो चुके हैं। एक-दो मौजूद हैं भी, लेकिन उनकी आभा खत्म हो चुकी है। इसके उलट मुलायम जीवन में आखिरी वक्त तक राजनीति में सक्रिय थे।
मुलायम पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बनने के करीब पहुंच गए थे। तब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार हुई थी। BJP ने 161 सीटें जीती थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन, यह सरकार सिर्फ 13 दिन चली। 141 सीटें जीतने वाली कांग्रेस दूसरे दलों के सहयोग से सरकार नहीं बनाना चहती थी। तब वाम दलों सहित दूसरी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाने की पहल की। प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम और लालू प्रसाद यादव के नामों पर विचार हुआ। चारा घोटाले में नामजद होने के कारण लालू दौड़ से बाहर हो गए। अब रेस में सिर्फ मुलायम बच गए।
लेकिन, लालू सहित कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम का रास्ता रोक दिया। मुलायम ने इस बारे में कई बार खुद भी बताया था। आखिरकार एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने। हालांकि, मुलायम सिंह को केंद्र में रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने बतौर रक्षामंत्री सैन्यबलों के मनोबल को बढ़ाने के कई उपाय किए। वे कई बार देश की सीमाओं पर गए। उन्हें एक सफल रक्षामंत्री के तौर पर याद किया जाता है।
1999 में लोकसभा चुनावों के बाद दोबारा प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम सिंह यादव के नाम पर विचार हुआ। लेकिन, उन्हें दूसरे नेताओं का साथ नहीं मिला। हालांकि, वह तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। यूपी की राजनीति में उनकी जबर्दस्त पकड़ थी। साल 2012 में यूपी विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। तब चुनावों में समाजवादी पार्टी की जीत हुई। अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने। तब से मुलायम पर्दे के पीछे रहते हुए यूपी और देश की राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी।