राहुल गांधी ही नहीं, भारतीय राजनीति में इन नेताओं पर भी गिरी अयोग्ता की गाज, किसी की गई विधायकी, तो किसी सांसद की कुर्सी छिनी
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, अगर किसी जनप्रतिनिधि को किसी मामले में दो साल या उससे ज्यादा कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो वह दोषी करार दिए जाने की तारीख से सदन की सदस्यता से अयोग्य हो जाएगा और सजा पूरी करने के बाद छह और साल के लिए अयोग्य रहेगा। यहां कुछ ऐसे नेताओं की लिस्ट है, जिन्हें आपराधिक मामलों में दोषी ठहराये जाने और सजा सुनाये जाने के बाद संसद और विधानसभाओं की सदस्यता छोड़नी पड़ी
भारतीय राजनीति में इन नेताओं पर भी गिरी अयोग्ता की गाज
आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) के एक मामले में सूरत की एक अदालत की तरफ से दोषी ठहराये जाने के बाद कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को लोकसभा (Lok Sabha) की सदस्यता के लिए अयोग्य (Disqualify) करार दिया गया है और उनका नाम इस तरह की कार्रवाई का सामना कर चुके जनप्रतिनिधियों की लिस्ट में शामिल हो गया है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, अगर किसी जनप्रतिनिधि को किसी मामले में दो साल या उससे ज्यादा कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो वह दोषी करार दिए जाने की तारीख से सदन की सदस्यता से अयोग्य हो जाएगा और सजा पूरी करने के बाद छह और साल के लिए अयोग्य रहेगा।
यहां कुछ ऐसे नेताओं की लिस्ट है, जिन्हें आपराधिक मामलों में दोषी ठहराये जाने और सजा सुनाये जाने के बाद संसद और विधानसभाओं की सदस्यता छोड़नी पड़ी।
इन नेताओं की छिनी विधायक और सांसद की कुर्सी
लालू प्रसाद: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष को सितंबर 2013 में चारा घोटाला के एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद लोकसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। उस समय वह बिहार के सारण से सांसद थे।
रशीद मसूद: कांग्रेस के उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद मसूद को सितंबर 2013 में MBBS सीट घोटाला मामले में चार साल की जेल की सजा सुनाये जाने के मद्देनजर उच्च सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराया गया था।
जे. जयललिता: अन्नाद्रमुक की तत्कालीन प्रमुख जयललिता को आय से ज्यादा संपत्ति रखने के मामले में चार साल जेल की सजा सुनाये जाने के बाद सितंबर 2014 में तमिलनाडु विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिया गया था।
पीपी मोहम्मद फैजल: लक्षद्वीप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल को जनवरी 2023 में हत्या की कोशिश के एक मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद वह खुद ही संसद सदस्यता के लिए अयोग्य हो गए थे।
हालांकि, केरल हाई कोर्ट ने बाद में फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित कर दिया। सांसद के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने अब तक उनकी अयोग्यता को वापस लेने के संबंध में नोटिफिकेशन जारी नहीं की है।
आजम खां: समाजवादी पार्टी (SP) के नेता आजम खां को 2019 के नफरत भरे भाषण के एक मामले में एक अदालत ने तीन साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें अक्टूबर 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए अयोग्य करार दिया गया था। वह रामपुर सदर विधानसभा से विधायक थे।
अनिल कुमार सहनी: RJD विधायक सहनी को धोखाधड़ी के एक मामले में तीन साल कारावास की सजा सुनाये जाने के बाद अक्टूबर 2022 में बिहार विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया गया था।
विक्रम सिंह सैनी: BJP विधायक सैनी को उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए अक्टूबर 2022 में अयोग्य करार दिया गया था। उन्हें 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में दो साल के कारावास की सजा सुनाई गR थी। सैनी खतौली सीट से विधायक थे।
प्रदीप चौधरी: कांग्रेस विधायक चौधरी को जनवरी 2021 में हरियाणा विधानसभा के लिए अयोग्य करार दिया गया था। उन्हें हमले के एक मामले में तीन साल जेल की सजा सुनाई गR थी। वह कालका से विधायक थे।
कुलदीप सिंह सेंगर: सेंगर को बलात्कार के एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद फरवरी 2020 में उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता खोनी पड़ी थी।
अब्दुल्ला आजम खां: समाजवादी पार्टी विधायक अब्दुल्ला आजम खां को फरवरी 2023 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए अयोग्य करार दिया गया था। कुछ दिन पहले ही एक अदालत ने 15 साल पुराने एक मामले में उन्हें दो साल कारावास की सजा सुनाई थी। आजम खां के बेटे अब्दुल्ला रामपुर की स्वार विधानसभा से सदस्य थे।
अनंत सिंह: RJD विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता जुलाई 2022 में चली गई थी। उन्हें उनके आवास से हथियार और गोला-बारूद जब्त होने से जुड़े मामले में दोषी करार दिया गया था। सिंह पटना जिले की मोकामा सीट से विधायक थे।
जगदीश शर्मा: बिहार के जहानाबाद सीट से JDU के लोकसभा सांसद शर्मा को चारा घोटाला मामले में सितंबर 2013 में चार साल कारावास की सजा सुनाई गई थी और इसके बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य करार दिया गया था।
आशा रानी: बीजेपी विधायक आशा रानी को मध्यप्रदेश के बैजावर विधानसभा सीट की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिया गया था। उन्हें घरेलू सहायिका (मेड) को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी करार दिया गया था।
एनोस एक्का: झारखंड के कोलेबिरा सीट से झारखंड पार्टी के विधायक एक्का के 2014 में सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उन्हें विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराया गया था।
बबनराव घोलप: महाराष्ट्र के देवलाली से शिवसेना विधायक घोलप को आय के ज्ञात स्रोत से ज्यादा संपत्ति मामले में मार्च 2014 में तीन साल के कारावास की सजा सुनाए जाने के मद्देनजर विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा था।