प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने शनिवार को जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज से मुलाकात की। पीएम मोदी ने कहा कि सुरक्षा और रक्षा सहयोग भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ बन सकता है। भारत यात्रा पर आए जर्मनी के चांसलर ओलाफ शॉल्ज के साथ बातचीत के बाद पीएम ने कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन के विवाद को हल करने के लिए कोशिश कर रहा है और किसी भी शांति प्रक्रिया में योगदान देने के लिए तैयार है। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर को मेघालय स्टोल और नागालैंड शॉल उपहार में दिया। आइये जानते हैं मेघालय स्टोल और नागालैंड शॉल के बारे में।
मेघालय स्टोल मूल रूप से खासी और जयंतिया रॉयल्टी के लिए बुने गए थे, जो उन्हें अपनी शक्ति और स्थिति का प्रतीक मानते थे। तब से मेघालय के स्टोल की बुनाई पीढ़ियों से चली आ रही है। मेघालय स्टॉल में प्रीकात्मक डीजाइन बनाई गई है जो कि खासी और जयंतिया जनजाति की संस्कृति और परंपरा को दर्शाती है। इस स्टॉल में बाघ, हाथी और फूलों की आकृतियां बनी होती हैं। ये स्टोल स्टोल स्थानीय रूप से प्राप्त ऊन और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
मेघालय स्टोल का उपयोग राजनयिक उपहार देने के रूप में किया जाता था। खासी और जयंतिया राजा अक्सर इन स्टोलों को सद्भावना और सम्मान के प्रतीक के रूप में अन्य शासकों को भेंट करते थे। ये स्टॉल उपहार के रूप में मेहमानों को भी दिए जाते हैं। मेघालय स्टॉल को ज्यादातर महिलाओं द्वारा पारंपरिक बनाई के तरीकों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है।
नगालैंड शॉल वहां की जनजातियों द्वारा पारंपरिक बुनाई की तकनीकों का इस्तेमाल करके बनाई जाती है। नागालैंड शॉल ट्राइबल्स द्वारा बनाई गए टेक्सटाइल आर्ट का एक नायाब नमूना है। यह नागाओं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। नागा शॉल एक अनूठी कहानी को भी बयान करती है। यह कहानियां जनजाति के इतिहास, विश्वासों और जीवन के तरीके को दर्शाती है। नागाओं का मानना है कि इस शॉल में जीवन भी होता है जिसमें आत्मा भी बसती है।
कैसे बनाई जाती है नागा शॉल
नागा शॉल को स्थानीय सामग्री जैसे कि कपास, रेशम और ऊन से बनाया जाता है। इसे पारंपरिक बुनाई तकनीकों में बैकस्ट्रैप करघे का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। बुनकर अक्सर समूहों में काम करते हैं और पूरा समुदाय बुनाई की प्रक्रिया में भाग लेता है। नागा शॉल की सबसे बड़ी खासियत है इसकी डिजाइन। जो कि नागा मिथकों और, कहानियों और विश्वासों से प्रेरित हैं।
नागा शॉल में इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्रतीकात्मक होते हैं। नागाओं का मानना है कि रंगों का उनके जीवन और सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, लाल साहस का प्रतीक है, जबकि काला शोक का प्रतिनिधित्व करता है। सफेद शुद्धता से जुड़ा है, और हरा विकास और समृद्धि का प्रतीक है। इन जीवंत रंगों को बनाने के लिए बुनकर अक्सर पौधों और जड़ों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हैं।शॉल अक्सर त्योहारों, समारोहों और अन्य विशेष अवसरों के दौरान रैंक और वंश के प्रतीक के रूप में पहने जाते हैं। इनका उपयोग कंबल के रूप में भी किया जाता है।