PM मोदी ने कहा, 'मेरी छवि बिगाड़ने के लिए दी गई सुपारी, जानें कहा से आया ये शब्द 'सुपारी' और क्या है इसका मतलब
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर एक सभा को संबोधित करते हुए, नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा था कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने पर आमादा हैं और उन्होंने इसके लिए भारत और देश के बाहर बैठे कुछ लोगों से मिलीभगत कर इसकी सुपारी दी है
PM मोदी ने कहा, मेरी छवि बिगाड़ने के लिए दी गई सुपारी (PHOTO- PTI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का 'सुपारी देने' (Supari) वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चाओं में है। रविवार को मोदी ने अपने संबधोन में कहा था कि कुछ लोगों ने उनकी छवि खराब करने के लिए 'सुपारी' दी है। इसके ठीक एक दिन बाद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने रविवार को पीएम से इन लोगों का नाम लेने की अपील की और कहा कि 'आइए हम उन पर मुकदमा चलाएं।'
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर एक सभा को संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा था कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने पर आमादा हैं और उन्होंने इसके लिए भारत और देश के बाहर बैठे कुछ लोगों से मिलीभगत कर इसकी सुपारी दी है।
खैर ये तो रही राजनीतिक बयानबाजी की बात, लेकिन याद कीजिए आपने ये 'सुपारी' शब्द पहले कहां सुना.. फिल्मों में? या फिर कहीं और? आइए आज हम जानते हैं कि 'सुपारी' शब्द का असल मतलब क्या है और आज के समय में इस शब्द को इस तरह क्यों इस्तेमाल किया जाता है।
सुपारी शब्द का क्या मतलब है?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय भाषाओं में 'सुपारी', areca और betel nut भी कहा जाता है। इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर के पान के साथ मिला कर उसे चबाया जाता है।
हालांकि, सुपारी शब्द को 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इस शब्द का इस्तेमाल कभी-कभी ऐसे आक्रामक कामों के लिए भी किया जाता है, जिसमें हत्या शामिल नहीं होती है। लेकिन इसे बदनामी, परिवाद, अपमानित करने या राजनीतिक या वैचारिक प्रतिद्वंद्वी को परेशान करने के लिए डिजाइन किया गया है।
आज सुपारी का क्या मतलब क्या?
मुंबई पुलिस के पूर्व ACP वसंत ढोबले ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पान और सुपारी के साथ शादी में आए मेहमानों को आमंत्रित करने की एक ग्रामीण महाराष्ट्र परंपरा से इसका मतलब निकलता है। पान-सुपारी का इस्तेमाल बाद में किसी डील या कॉट्रैक्ट के लिए किया जाने लगा, जैसे कि घर बनाने या मरम्मत करने के लिए। जैसे कि किसी शख्स के पास किसी काम को करना कॉन्ट्रैक्ट है, तो वो बोलता कि इस काम कि सुपारी (कॉन्ट्रैक्ट) हमारे पास। तब तक ये शब्द हत्या या गुंडागर्दी के कामों के लिए इस्तेमाल नहीं होता था।
ढोबले ने बताया कि पुलिस बल में शामिल होने वालों में से ज्यादा महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों से थे। वे सर्विस के दौरान भी अपनी भाषा और भावों के साथ ही बात करते थे।
जैसे-जैसे मुंबई अंडरवर्ल्ड के ऑपरेशन शहर में अपराध पर हावी होने लगे और गैंगलैंड की हत्याएं तेज हो गईं, तब ये वाक्यांश चलने लगा, 'उसकी सुपारी इसने दी या उसकी सुपारी इसके पास है।' इसका मतलब कि किस ने किसी को मारने का कॉन्ट्रैक्ट लिया है।
सुपारी शब्द का और पहलू भी है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के माहिम क्षेत्र के राजा भीम ने "सुपारी" शब्द का इस्तेमाल किया था। मुंबई के अंडरवर्ल्ड का इतिहास बताने वाली किताब 'डोंगरी टू दुबई' के लेखक हुसैन जैदी ने बताया कि किस तरह महेमी जनजाति के प्रमुख भीम का एक अनूठा समारोह था।
अगर उसे कोई मुश्किल काम सौंपना होता, तो वो अपने माहिम किले में एक मीटिंग बुलाता, जहां योद्धाओं को एक भव्य दावत दी जाती थी। दावत के बाद, भीड़ के बीच में एक थाली में पान रखा जाता, और जो आदमी पत्ता तोड़ता था, उसे ही वो मुश्किल टास्क सौंपा जाता था। इसका मतलब ऐसे लगाया जा सकता है कि पान पत्ता उठाने का मतलब, चुनौती को स्वीकार करना होता था।
कैसे अंजाम दी जाती थी अंडरवर्ल्ड की 'सुपारी'?
रिपोर्ट में बताया गया, 1980 और 1990 के दशक में, जब सुपारी लेकर हत्या करने का चलन था, तब ये होता था कि अगर किसी को अपने दुश्मन या प्रतिद्वंद्वी की हत्या करानी होती थी, तो वो मुंबई में अंडरवर्ल्ड को उसकी सुपारी यानी मारने का कॉन्ट्रैक्ट देता था।
सुपारी की कीमत टारगेट कौन है, क्या है और काम कितना मुश्किल है, ये सब देख कर ही तया हुआ करती थी। पैसे का पेमेंट आम तौर पर किश्तों में किया जाता था, जिसमें बकाया रकम 'काम खत्म होने के बाद' दी जाती थी।
ज्यादातर मामलों में, सुपारी देने वाला व्यक्ति ही टारगेट के ठिकाने के साथ-साथ हमले के लिए सबसे अच्छा समय और जगहों के बारे में भी जानकारी देता था। इस काम को अंजाम देने वाला कुछ दिनों तक टारगेट की निगरानी करता था। इसके बाद हत्यारे अंडर ग्राउंट हो जाते थे।
1990 के दशक में, ऐसी खबरें भी आई थीं कि दाऊद इब्राहिम गैंग या छोटा राजन गैंग से संबंध रखने वाले कुछ पुलिस विरोधी समूह के सदस्यों को मार देंगे। उन दिनों अपने हथियारों के दम पर मुंबई पर राज करने वाले ये दो प्रमुख गैंग थे।