Modi Surname Remark Case: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मोदी सरनेम मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार संबंधी गुजरात हाई कोर्ट (Gujarat High Court) के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर गुजरात सरकार और याचिकाकर्ता सहित अन्य को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता और गुजरात बीजेपी के विधायक पूर्णेश मोदी को भी नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने पर मामले की अब सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने 18 जुलाई को मामले का उल्लेख करते हुए याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई थी। राहुल गांधी ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि 7 जुलाई के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे स्वतंत्र भाषण, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, स्वतंत्र विचार और स्वतंत्र वक्तव्य का दम घुट जाएगा।
राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी कि "सभी चोरों का समान सरनेम मोदी ही क्यों होता है?" इस टिप्पणी को लेकर गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने गांधी के खिलाफ 2019 में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
गांधी ने अपनी याचिका में कहा कि यदि हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई तो यह लोकतांत्रिक संस्थानों को व्यवस्थित तरीके से, बार-बार कमजोर करेगा और इसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र का दम घुट जाएगा, जो भारत के राजनीतिक माहौल और भविष्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक होगा।
राहुल गांधी ने कहा कि आपराधिक मानहानि के इस मामले में अप्रत्याशित रूप से अधिकतम दो साल की सजा दी गई, जो अपने आप में दुर्लभतम है। इस मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी।
मामले में फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।