Manipur Viral Video: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने वाली भीड़ में शामिल और एक पीड़िता को घसीटने वाले व्यक्ति सहित चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 4 मई को महिलाओं के साथ हुई इस घटना की सभी देशवासी निंदा कर रहे हैं। दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराए जाने से संसद से लेकर सड़क तक देशभर में गुस्सा देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन महिलाओं के साथ कथित तौर पर गैंगरेप भी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय महिला आयोग ने शर्मनाक मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताया है।
न्यूज 18 के मुताबिक, चेकमाई इलाके में मुख्य आरोपी के घर को कथित तौर पर स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने आग लगा दी। सूत्रों ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि संदिग्ध के परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था। एक दिन पहले ग्रामीणों ने आरोपी हेरादास सिंह के घर में आग लगा दी और उसके परिवार को भी बहिष्कृत कर दिया। इस बीच पुलिस अधिकारी महिलाओं का बयान दर्ज कर रहे हैं और घटनास्थल के आसपास छापेमारी की जा रही है। एक सूत्र ने बताया कि तलाशी अभियान जारी है।
पुलिस ने बताया कि 19 जुलाई को सामने आए 26 सेकेंड के वीडियो में गिरफ्तार आरोपियों में से एक को कांगपोकपी जिले के बी. फाइनोम गांव में भीड़ को सक्रिय रूप से निर्देश देते हुए देखा जा सकता है। इस आरोपी की पहचान 32 वर्षीय हुईरेम हेरादास सिंह के रूप में हुई है। गिरफ्तार किए गए अन्य तीन आरोपियों की पहचान तत्काल पता नहीं चली है। वरिष्ठ अधिकारी वीडियो का विश्लेषण कर रहे हैं और उसमें मौजूद लोगों की मिलान गिरफ्तार आरोपियों के साथ कर रहे हैं।
वीडियो पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस ने बुधवार रात कहा था कि अज्ञात हथियारबंद बदमाशों के खिलाफ थाउबल जिले के नोंगपोक सेकमाई थाने में अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया गया है तथा दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए हरसंभव प्रयास जारी हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रात भर चली छापेमारी के बाद एक आरोपी हुईरेम हेरादास सिंह को थाउबल जिले से गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसा आरोप है कि भीड़ ने दोनों आदिवासी महिलाओं को छोड़ने से पहले उनका कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया था।
सजा-ए-मौत दिलाने का भरोसा
मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने घटना को अमानवीय करार दिया और कहा कि अपराधियों को सजा-ए-मौत मिलना चाहिए। घटना की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे मानवता के प्रति अपराध बताया और कहा कि उनकी सरकार इस जघन्य अपराध पर चुप नहीं रहेगी। सिंह ने कहा कि वीडियो देखते ही उन्होंने साइबर अपराध विभाग से इसका सत्यापन करने को कहा और अपराधियों को पकड़ने के लिए अधिकारियों को व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाने का निर्देश दिया।
सीएम ने आगे कहा कि उनकी सरकार राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और इसके तहत अलग-अलग समुदायों के विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों, कारोबारियों, धार्मिक नेताओं से बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से साथ रहते आए हैं और भविष्य में भी साथ रहेंगे, समुदायों के बीच की गलतफहमी दूर की जा सकती है और बातचीत के जरिए इसे सुलझाया जा सकता है ताकि हम फिर से शांतिपूर्ण तरीके से साथ रह सकें।
'मेइती समुदाय शर्मिंदा और गुस्से में है'
मेइती समुदाय के प्रभावशाली संगठन कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑन मणिपुर इंटिग्रिटी (COCOMI) ने भी एक बयान जारी करके कहा कि वह मणिपुर के सुदूर गांव में दिन-दहाड़े दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की बर्बर और असभ्य हिंसक घटना की कटु आलोचना करता है। बयान में कहा गया कि COCOMI आरोपियों को ढूंढ़ निकालने का हर प्रयास कर रहा है, फिर चाहे वे किसी भी कोने में हों।
बयान में आगे कहा गया है कि वीडियो क्लिप को लेकर पूरा मेइती समुदाय शर्मिंदा और गुस्से में है। COCOMI इस पर यकीन रखता है कि इस जघन्य घटना में शामिल लोगों को मेइती समुदाय किसी रूप में नहीं बख्शेगा और अपराध में शामिल सभी लोगों को समुचित दंड दिया जाएगा।
मणिपुर में 4 मई को हुई इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल महिला हाहत वाइफेई ने दावा किया कि बी. फाइनोम गांव के लोगों ने एक दिन पहले भी ऐसी ही घटना को अंजाम देने के प्रयास को विफल किया था। पड़ोसी राज्य मिजोरम के एक यू-ट्यूब चैनल से वाइफेई ने कहा कि जब हम गांव छोड़कर जाने लगे तो भीड़ ने हमें पकड़ लिया। वे हमें घसीटकर गांव से बाहर ले गए, जबकि हम मिन्नतें करते रहे। उन्होंने बताया कि भीड़ ने दो महिलाओं को पहले जबरन निर्वस्त्र घुमाया और फिर उनके साथ बलात्कार किया।
राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर मेइती समुदाय द्वारा पहाड़ी जिलों में 3 मई को आयोजित ट्राइबल सॉलिडारिटी मार्च (आदिवासी एकजुटता मार्च) वाले दिन मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क गई थी और अभी तक इसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। मणिपुर में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है। वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नागा और कुकी समुदाय के आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत है, जो पहाड़ी जिलों में रहते हैं।