Ram Mandir Inauguration: अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (Ram Mandir Prana Pratishtha) के लिए गांधी परिवार में से सिर्फ सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को ही निमंत्रण मिला है। जबकि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और उनकी बहन प्रियंका गांधी राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तय किए मानदंड के आधार पर इस समारोह के निमांत्रण पाने के हकदार नहीं हैं। 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) अपने हाथों से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे।
TOI ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि सोनिया गांधी को मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा की तरफ से निमंत्रण भेजा गया है। उन्हें ये निमंत्रण कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख होने के नाते दिया गया है।
ट्रस्ट ने राजनीतिक मेहमानों को न्योता भेजने के लिए तीन तरह की कैटेगरी बनाई हैं, जिसमें प्रमुख पार्टियों के अध्यक्ष, लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और वे लोग जिन्होंने 1984 से लेकर 1992 तक राम मंदिर आंदोलन में अपना योगदान दिया था।
इसके अलावा जिन विशेष अतिथियों के लिए ट्रस्ट रेड कार्पेट बिछा रहा है, उनमें साधु-संत, उद्योगपति, कलाकार और खिलाड़ी शामिल हैं।
किसे मिला और किसे मिलेगा निमंत्रण?
वहीं VHP के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को आमंत्रित किया, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। क्योंकि 2014 के बाद से लोकसभा में विपक्ष का कोई आधिकारिक नेता नहीं है, इसलिए VHP ने कांग्रेस के सदन नेता अधीर रंजन चौधरी को निमंत्रण भेजा है।
इसी कड़ी में, ट्रस्ट के अधिकारी ने बताया कि अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की चीफ मायावती को भी निमंत्रण भेजा जाएगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को न्योता पहले ही भेज दिया गया है।
TOI के मुताबिक, VHP के राष्ट्रीय महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा, "भगवान राम सभी के हैं। कोई भेदभाव नहीं होगा। हमने यह सुनिश्चित करने का फैसला किया है कि समारोह का कोई राजनीतिक रंग न हो। राम का स्वागत होगा।"
VHP नेता का ऐसे समय आया, जब कई विपक्षी नेताओं ने ये आरोप लगाया कि उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का न्योता नहीं मिला। साथ ही उन्होंने RSS और BJP पर धर्म को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।
परांडे ने आगे कहा, ये विडंबना है कि CPI और तृणमूल कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने समारोह में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, "वे ही लोग इस घटना को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। इन लोगों को राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब, अगर इसका समर्थन करने वालों को लंबे समय से प्रतीक्षित राम मंदिर के वास्तविकता में बदलने से लाभ होता है, तो उन्हें ईर्ष्या महसूस नहीं करनी चाहिए।"