Ram Mandir: 'राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की इतनी जल्दी क्यों?' कांग्रेस ने शंकराचार्यों की बात न सुनने को लेकर BJP पर साधा निशाना

Ram Mandir Inauguration: उत्तराखंड के ज्योतिर मठ के प्रमुख, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि चार प्रमुख शंकराचार्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि राम मंदिर का निर्माण पूरा किए बिना ही प्रतिष्ठा समारोह किया जा रहा है। 22 जनवरी को मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 1:06 PM
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Ram Mandir: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की इतनी जल्दबाजी क्यों? कांग्रेस ने शंकराचार्यों की बात न सुनने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा

Ram Mandir Inauguration: चारों शंकराचार्य (Shankracharya) की ओर अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) उद्घाटन में शामिल होने से इनकार करने के बाद, कांग्रेस (Congress) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा, 'वे एक निर्माणाधीन इमारत का उद्घाटन करने की जल्दी में क्यों हैं?' शंकराचार्यों ने हवाला दिया कि ये आयोजन 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह के लिए शास्त्रों मे दिए दिशानिर्देशों का पालन करते हुए नहीं हो रहा है।

कांग्रेस नेता अलका लांबा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "उनसे (BJP) पूछिए कि शंकराचार्य (प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने) क्यों नहीं जा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण अधूरा है, बीजेपी और पीएम को इतनी जल्दी क्यों है? निर्माणाधीन मंदिर का उद्घाटन करना और इसका राजनीतिकरण करना, ये साफ है क्योंकि चुनाव नजदीक आ रहे हैं।”

इसी तरह कर्नाटक कांग्रेस के नेता प्रियांक खड़गे ने सवाल किया, "चार शंकराचार्य और संत कह रहे हैं कि राम मंदिर अधूरा है। BJP कांग्रेस से जवाब क्यों मांग रही है, लेकिन शंकराचार्य क्या कह रहे हैं, यह नहीं सुन रही?"


समारोह में शामिल होने से क्यों इनकार कर रहे हैं शंकराचार्य?

उत्तराखंड के ज्योतिर मठ के प्रमुख, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि चार प्रमुख शंकराचार्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि मंदिर का निर्माण पूरा किए बिना ही प्रतिष्ठा समारोह किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा, “किसी घृणा या द्वेष के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि शास्त्र-विधि (शास्त्रों के अनुष्ठान) का पालन करना और यह सुनिश्चित करना शंकराचार्यों का कर्तव्य है कि उनका पालन किया जाए। और यहां शास्त्र-विधि की अनदेखी की जा रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्राण प्रतिष्ठा तब की जा रही है, जब मंदिर अभी भी अधूरा है।"

दूसरी ओर, ज्योतिष पीठ मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस बात पर जोर दिया कि 'मंदिर का निर्माण सनातन धर्म की जीत का प्रतीक नहीं है।'

उन्होंने कहा, "अयोध्या में पहले से ही एक राम मंदिर था, और इसका निर्माण धर्म के लिए कोई उपहार या विजय नहीं है। 22 जनवरी को राजनीतिक नेताओं का अयोध्या न जाना उनकी राजनीतिक बाधाओं के कारण हो सकता है, लेकिन ऐसी कोई बाधा मुझे नहीं रोकती।"

उन्होंने आगे कहा, "जब देश में गौहत्या बंद हो जाएगी, तो मैं हर्षोल्लास के साथ जश्न मनाते हुए अयोध्या के राम मंदिर जाऊंगा। माननीय न्यायालय के निर्णय के बाद से भूमि हिंदुओं की है और इसका उपयोग या दुरुपयोग उनके विवेक पर निर्भर करता है।"

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इस बीच, पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भगवान राम के सम्मान को बनाए रखने के बारे में चिंता जताई और जोर दिया कि पूजा पारंपरिक प्रथाओं के अनुरूप होनी चाहिए।

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा, "यह शास्त्रों में दिए गए दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए, और पूजा इस विश्वास के अनुसार की जानी चाहिए कि राम धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं। शास्त्र के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा और पूजा कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, नहीं तो देवताओं की चमक कम हो जाती है, और राक्षसी संस्थाएं प्रवेश कर तबाही मचाती हैं।"

22 जनवरी को मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। अयोध्या में इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, BJP नेता, अभिनेता, खेल सितारे, मशहूर हस्तियां और हजारों संतों के शामिल होने की उम्मीद है।

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