Sedition Law: तब तक रुकवा क्यों नहीं देते राजद्रोह कानून? दोबारा विचार करने की बात पर SC का केंद्र सरकार से सवाल

Sedition Law: कोर्ट ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार राज्यों को राजद्रोह के आरोपों के तहत पहले से गिरफ्तार लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी कर सकती है?

अपडेटेड May 10, 2022 पर 5:45 PM
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राजद्रोह कानून पर दोबारा विचार करने की बात पर SC का केंद्र सरकार से सवाल (FILE PHOTO)

Sedition Law: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार को केंद्र को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (Sedition) की फिर से जांच करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार राज्यों को राजद्रोह के आरोपों के तहत पहले से गिरफ्तार लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी कर सकती है? और क्या सरकार के फैसले तक इस प्रावधान को लागू नहीं कर सकती है। केंद्र सरकार बुधवार को इस पर जवाब देगी।

प्रधान जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बैंच ने केंद्र की दलीलों का संज्ञान लिया। इसमें कहा गया था कि सरकार ने राजद्रोह कानून की "दोबारा जांच और विचार" करने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह केंद्र से निर्देश लेंगे और बुधवार को बेंच को अवगत कराएंगे।


बैंच ने कहा, "हम इसे बहुत साफ कर रहे हैं। हम निर्देश चाहते हैं। हम आपको कल तक का समय देंगे। हमारा जरूरी सवाल पेंडिंग केस को लेकर है। दूसरा सवाल यह है कि सरकार भविष्य के मामलों से कैसे निपटेगी?”

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कोर्ट इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया मांगते हुए पूछा कि क्या भविष्य के मामलों को पुनर्विचार होने तक स्थगित रखा जा सकता है?

सोमवार को, केंद्र सरकार ने घोषणा की कि उसने राजद्रोह कानून की "दोबारा जांच और पुनर्विचार" करने का फैसला किया है। साथ ही शीर्ष अदालत से एक बार फिर इसके प्रावधानों की वैधता की जांच में "समय न गंवाने" का आग्रह किया है।

गृह मंत्रालय ने दायर किया हलफनामा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा कि उसका निर्णय औपनिवेशिक चीजों से छुटकारा पाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों के अनुरूप है। वह नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के सम्मान के पक्षधर रहे हैं। इसी भावना से 1,500 से ज्यादा अप्रचलित हो चुके कानूनों को खत्म कर दिया गया है।

हलफनामे के अनुसार, "प्रधानमंत्री इस विषय पर व्यक्त अनेक विचारों से अवगत रहे हैं और उन्होंने समय-समय पर अनेक मंचों पर नागरिक स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों के सम्मान के पक्ष में अपना स्पष्ट रुख व्यक्त किया है।"

इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा है कि विविधतापूर्ण विचारों का यहां बड़ी खूबसूरती से आकार लेना देश की एक ताकत है।

हलफनामे में कहा गया, "प्रधानमंत्री मानते हैं कि जब देश ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है, तो हमें एक राष्ट्र के तौर पर उन औपनिवेशिक चीजों से छुटकारा पाने के लिए और परिश्रम करना होगा, जिनकी उपयोगिता खत्म हो चुकी है। इनमें अप्रचलित हो चुके औपनिवेशिक कानून और प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।"

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