Bihar Politics: शरद यादव ने अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का लालू यादव की RJD में किया विलय

शरद ने कहा कि तेजस्वी भविष्य हैं। आज युवाओं की जरूरत है। RJD आपकी पार्टी है। आपको उन्हें मजबूत करना होगा। उनके हाथों को मजबूत करो

अपडेटेड Mar 20, 2022 पर 6:23 PM
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शरद यादव ने अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का लालू यादव की RJD में किया विलय

Bihar: वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव (Sharad Yadav) ने रविवार को अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में विलय कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों में एकता पर बल दिया।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दिग्गज नेता का अपनी पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि यह बीजेपी विरोधी दलों के लिए सरकार के खिलाफ एकजुट होने का संदेश है। शरद यादव विगत में तेजस्वी के पिता व आरजेदी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

शरद यादव (74) पिछले दिनों स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके इस कदम को उनके सहयोगियों के पुनर्वास के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि जनता दल (यू) (JDU) नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई थी, लेकिन उसका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा।


2019 RJD के टिकट पर लड़ा था चुनाव

उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव RJD के टिकट पर लड़ा था। वहीं उनकी बेटी ने 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। उस समय कांग्रेस-RJD नीत गठबंधन में शामिल थी।

शरद यादव ने यहां मीडिया से कहा कि विपक्षी दलों की एकता उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने बिहार में बीजेपी नीत एनडीए के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए तेजस्वी यादव की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि बीजेपी से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को देश भर में हाथ मिलाना चाहिए।

अखिलेश से भी करेंगे बात- शरद यादव

शरद ने कहा, "वह (तेजस्वी) भविष्य हैं। आज युवाओं की जरूरत है। RJD आपकी पार्टी है। आपको इसे मजबूत करना होगा। उसके हाथ मजबूत करो। मैं पहले की तरह सक्रिय नहीं हो सकता, लेकिन मैं उसे मजबूत करने की पूरी कोशिश करूंगा।"

उन्होंने आगे कहा, "हम अपनी लड़ाई को मजबूत करने के लिए अखिलेश से बात करेंगे... मेरा मानना ​​है कि लालू प्रसाद एक दिन आजाद होकर चलेंगे। वह जेल में नहीं होते, अगर उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों से समझौता किया होता।"

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इससे पहले अपने दोस्त से प्रतिद्वंद्वी और फिर दोस्त बने लालू यादव की राजनीतिक पार्टी में विलय के अपने फैसले की घोषणा करते हुए, शरद ने कहा कि यह तत्कालीन जनता दल के विभिन्न अलग-अलग संगठनों को एक साथ लाने के उनके प्रयासों का हिस्सा होगा।

वहीं तेजस्वी ने शरद को "पिता-तुल्य और समाजवादी आइकन" बताया। उन्होंने हाल में पटना में कहा था, "हर कोई भारतीय राजनीति में अनुभवी समाजवादी शरद यादव के महत्व को जानता है। वह एक पिता तुल्य हैं और हमारा मार्गदर्शन करेंगे।"

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