UP Elections 2022: 'अखिलेश ने हमें अपमानित किया, नहीं चाहतें दलितों का समर्थन' भीम आर्मी चीफ का गठबंधन से इनकार

चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को दलितों का समर्थन नहीं चाहिए"

अपडेटेड Jan 15, 2022 पर 2:04 PM
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चंद्रशेखर आजाद का गठबंधन से इनकार (FILE)

भीम आर्मी (Bhim Army) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने शनिवार को कहा कि उनकी आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party), अगले महीने से शुरू हो रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन नहीं कर रही है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को दलितों का समर्थन नहीं चाहिए।"

सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए समाजवादी पार्टी प्रमुख से मुलाकात के एक दिन बाद चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया से कहा, "कल अखिलेश जी ने हमें अपमानित किया... कल अखिलेश जी ने बहुजन समाज को अपमानित किया।"

आजाद ने आगे कहा, "आखिर में, मुझे लगा कि अखिलेश जी इस गठबंधन में दलित नेताओं को नहीं चाहते... उन्हें केवल दलित वोट चाहिए। मेरा डर यह था कि अगर दलित उन्हें वोट देते हैं और वह सरकार बनाते हैं, तो हम उनसे अपनी समस्याओं के बारे में बात नहीं कर पाएंगे ... अगर हमें पीटा जाता है, अगर हमारी जमीन पर कब्जा किया जाता है और हमारी महिलाओं का बलात्कार होता है, जैसे हाथरस में हुआ।"


वहीं अखिलेश यादव ने इसके जवाब में कहा, "समजवादी पार्टी से उन्होंने (भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद) जो भी बात की मैंने उनकी बात मानी और रामपुर मनिहरन और गाजियाबाद वाली सीटें उनको दी। उन्होंने किसी से फोन पर बात करने के बाद मुझको बताया कि वह चुनाव साथ में नहीं लड़ सकते।"

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव ने आजाद समाज पार्टी को तीन सीटों की पेशकश की, लेकिन चंद्रशेखर आजाद 10 सीटों की मांग कर रहे थे और बीच का रास्ता नहीं बनाया जा सका।

समझा जाता है कि आजाद और अखिलेश के बीच इन चुनावों को एक साथ लड़ने के लिए एक व्यापक समझौता है, भीम आर्मी प्रमुख के सहारनपुर में अपने गढ़ से खड़े होने की संभावना है।

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आजाद ने कहा, "अखिलेश जी ने हमें एक महीने पहले कहा था कि हम एक साथ चुनाव लड़ेंगे। मैं यहां दो दिनों के लिए अपनी संयुक्त लड़ाई पर चर्चा करने के लिए आया था। मैं BJP को रोकने के लिए अखिलेश जी के साथ जुड़ना चाहता था, लेकिन वह दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा, "मैं दो दिनों में अपने अगले कदम के बारे में फैसला करूंगा... जल्द ही तीसरा मोर्चा तैयार हो सकता है।"

नवंबर में आजाद ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ यूपी चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, "मैं योगी को जीतने नहीं दूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।"

चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "मैं दूसरे विपक्षी दलों से भी योगी के खिलाफ मेरा समर्थन करने की अपील करूंगा..उन्होंने साढ़े चार साल से जनता को परेशान किया है।"

उन्होंने तब यह भी कहा था कि वह मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन चाहते थे, क्योंकि "हम नहीं चाहते कि बहुजन वोट बटे।"

यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

यादव ने कांग्रेस जैसे बड़े दलों से मदद ठुकरा दी है और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (जिसने पिछले साल समाजवादी पार्टी के साथ करार किया था) और जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल जैसे क्षेत्रीय संगठनों के साथ मिल कर एक "इंद्रधनुष" गठबंधन किया है।

उन्होंने OBC वोट आधार पर काफी प्रभाव वाले BJP नेताओं को भी अपनी तरफ कर लिया है, जिनमें (अब तक) स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी का नाम है, जो कल ही उनकी पार्टी में शामिल हुए। यह दोनों नेता योगी कैबिनेट में मंत्री थे।

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