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आखिर किस महारानी ने हारे हुए पति के लिए किले का दरवाजा बंद कर दिया था

बर्नियर के अनुसार महाराजा जसवंत सिंह राठौर अपने 30,000 राजपूत वीरों को लेकर फ्रांसीसी सेना से युद्ध करने के लिए गया था। राजपूतों ने पूरी बहादुरी दिखाई। जहां तक उनका वश चला वे लड़े भी। परंतु आखिर में हुआ यह कि शत्रु सेनाओं ने हर ओर से घेरा डाल दिया

Surendra Kishoreअपडेटेड Jun 04, 2023 पर 11:26 PM
आखिर किस महारानी ने हारे हुए पति के लिए किले का दरवाजा बंद कर दिया था
अपने राज घराने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए वह चाहती थी कि पति या तो जीत कर आएं या युद्ध भूमि में ही शहीद हो जाएं

मध्ययुग में राजस्थान की एक महारानी ने अपने पराजित महाराजा पति के लिए किले के दरवाजे बंद करवा दिए थे। फ्रांस के इतिहासकार बर्नियर ने लिखा है कि महाराजा जसवंत सिंह जब युद्ध में हार कर अपने किले के गेट पर लौटे तो उनकी पत्नी ने किले का दरवाजा बंद करवा दिया। उसने पति की हार से खुद को अपमानित महसूस किया था। अपने राज घराने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए वह चाहती थी कि पति या तो जीत कर आएं या युद्ध भूमि में ही शहीद हो जाएं।

कई राज घरानों की महिलाएं पराजय के बाद खुद जौहर कर लिया करती थीं। क्योंकि उन्हें आशंका रहती थी कि आक्रांता मृत शरीर के साथ भी कुकृत्य कर सकते थे। ऐसा ही उनका इतिहास था। एक तरफ तो बर्नियर ने ऐसा लिखा है, लेकिन दूसरी तरफ आधुनिक भारत में बंधकों के कुछ सौ रिश्तेदारों ने अटल बिहारी सरकार पर भारी दबाव बनाकर सन 1999 में खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर और उसके दो साथियों को रिहा कर देने के लिए बाध्य कर दिया था। अजहर के गुर्गों ने भारतीय विमान का अपहरण करके फिरौती में मसूद अजहर की रिहाई की मांग की थी।

आज भी जब कुछ खास आतंकवादियों के खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई करती है तो इसी देश के कुछ खास तरह के लोगों को भारी दर्द होने लगता है। बर्नियर के अनुसार महाराजा जसवंत सिंह राठौर अपने 30,000 राजपूत वीरों को लेकर फ्रांसीसी सेना से युद्ध करने के लिए गया था। राजपूतों ने पूरी बहादुरी दिखाई। जहां तक उनका वश चला वे लड़े भी। परंतु आखिर में हुआ यह कि शत्रु सेनाओं ने हर ओर से घेरा डाल दिया। घेराव से बचने के लिए महाराजा जसवंत सिंह राठौर अपने 20,000 सैनिकों को लेकर राजधानी वापस पहुंच गया। इस युद्ध में उसके 10 हजार सैनिक युद्ध में मारे जा चुके थे।

महाराजा के लौटने की खबर सुनकर महारानी के चेहरे पर जो भाव व्यक्त हो रहे थे, उसे देख कर बर्नियर को यही लग रहा होगा, जो उसने लिखा। बर्नियर के अनुसार महाराजा की पत्नी उदय पुर के महाराणा की पुत्री थी। वह राठौर को युद्ध से हार कर लौटते देखना नहीं चाहती थी। वह समझती थी कि वैसा व्यक्ति न तो मेरा पति होने लायक है और न ही राणा का दामाद होने लायक है।

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