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पीएम मोदी के नए कैबिनेट में जगह पाने वाले आखिर क्यों खास हैं और ये क्या संदेश दे रहे हैं

पीएम मोदी ने नए कैबिनेट में अमित शाह को को-ऑपरेटिव मंत्रालय क्यों दिया, मनसुख मंडाविया को हेल्थ मिनिस्ट्री क्यों दी, ऐसे ही सवालों का जवाब इस लेख मिलेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 11, 2021 पर 6:17 PM
पीएम मोदी के नए कैबिनेट में जगह पाने वाले आखिर क्यों खास हैं और ये क्या संदेश दे रहे हैं

हर्ष वर्धन त्रिपाठी

दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में हर कोई हैरान-परेशान मुद्रा में है कि नरेंद्र मोदी ने किस आधार पर मंत्रियों को हटाया और नये मंत्रियों को किस आधार पर मंत्रालय दिया। इसे समझने के लिए दो उदाहरण काम के हैं। गुजरात में 1998 तक सहकारी संस्थानों, बैंकों में कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था।

सिर्फ़ एक सहकारी बैंक पर भारतीय जनता पार्टी क़ाबिज़ थी। अमित शाह को यह बात चुभती थी, उन्होंने सहकारी संस्थानों से कांग्रेस को बेदख़ल करने की योजना तैयार की और उसे सलीके से लागू किया। धीरे-धीरे कांग्रेस गुजरात के सहकारी संस्थानों से पूरी तरह से ग़ायब हो गई।

अमित शाह की अगुआई में सहकारी संस्थानों में कमल खिल गया और भारतीय जनता पार्टी की पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत हो गई। अमित शाह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन बने और एक वर्ष के भीतर ही घाटे में चल रहा एशिया का सबसे बड़ा सहकारी बैंक लाभ में आ गया।

अमित शाह की यही क्षमता थी कि 2001 में भारतीय जनता पार्टी की सहकारी समिति के राष्ट्रीय संयोजक का ज़िम्मा उन्हें दे दिया गया। और, अब जब नरेंद्र मोदी ने नया सहकारिता मंत्रालय बनाया तो उसके मंत्री के तौर पर अमितभाई से उपयुक्त कौन होता। केंद्रीय गृह मंत्री के साथ अब सहकारिता मंत्री भी अमित शाह हैं।

दरअसल, यह दृष्टांत ही तय कर देता है कि नरेंद्र मोदी के इस सबसे बड़े बदलाव के मूल में क्या है। पारंपरिक तरीक़े से राजनीति को देखने पर शायद ही समझ में आए कि गृह मंत्रालय के साथ सहकारिता मंत्रालय एक ही व्यक्ति को भला कैसे दिया जा सकता है और यही सोच है जो देश के नये स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को ख़ारिज करती है कि मांडविया रसायन और उर्वरक मंत्रालय के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का ज़िम्मा कैसे ठीक से संभाल पाएंगे।

जब देश में चाइनीज़ वायरस के क़हर की दूसरी लहर चरम पर थी और देश में दवा का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की चुनौती भी विकराल रूप धरे दिख रही थी। सरकार से लेकर विपक्ष तक तरह-तरह के सुझाव आ रहे थे। इसी बीच 18 मई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने एक आयोजन किया, जिसमें रसायन उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया और राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को अपनी बात रखना था।

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