Rahul Gandhi: दो साल की सजा होने पर बचेगी या जाएगी राहुल गांधी की सांसदी? 2013 में न फाड़ा होता विधेयक, तो नहीं बढ़ती मुश्किल

मजिस्ट्रेट एच एच वर्मा की अदालत ने राहुल गांधी को जमानत भी दे दी और उनकी सजा पर 30 दिन की रोक लगा दी, ताकि कांग्रेस नेता उसके फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकें। अदालत ने कांग्रेस नेता को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया। ये धाराएं मानहानि और उससे जुड़ी सजा से जुड़ी हैं। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या दो साल जेल की सजा होने पर राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द होगी या नहीं

अपडेटेड Mar 23, 2023 पर 2:29 PM
Story continues below Advertisement
राहुल गांधी को कोर्ट ने आपराधिक मानहानि के एक मामले में दो साल जेल की सजा सुनाई

सूरत (Surat) की एक अदालत ने ‘‘मोदी सरनेम’’ (Modi Surname) से जुड़े एक बयान को लेकर कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि (criminal defamation case) के एक मामले में उन्हें बृहस्पतिवार को दो साल जेल की सजा सुनाई। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वकील बाबू मंगुकिया ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एच एच वर्मा की अदालत ने राहुल गांधी को जमानत भी दे दी और उनकी सजा पर 30 दिन की रोक लगा दी, ताकि कांग्रेस नेता उसके फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकें।

अदालत ने कांग्रेस नेता को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया। ये धाराएं मानहानि और उससे जुड़ी सजा से जुड़ी हैं। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या दो साल जेल की सजा होने पर राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द होगी या नहीं?

दरअसल जनप्रतिनिधि कानून के अनुसार, दो साल या उससे ज्यादा समय के लिए जेल की सजा पाने वाले व्यक्ति को ‘‘दोषसिद्धि की तारीख से’’ अयोग्य घोषित किया जाएगा और वह सजा पूरी होने के बाद जनप्रतिनिधि बनने के लिए छह साल तक अयोग्य रहेगा, यानी 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएगा।


लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत तकनीकी रूप से राहुल गांधी को दो साल की सजा होने के बाद लोकसभा से अयोग्य ठहराती है, जब तक कि हाई कोर्ट की तरफ से सजा पर रोक नहीं लगाई जाती है।

फिलहाल राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बरकरार है, क्योंकि क्योंकि उन्हें दोषी ठहराने वाली सूरत की अदालत ने उनकी सजा 30 दिनों के लिए निलंबित कर दी है। इसके चलते वह तत्काल अयोग्यता से बच गए हैं।

जब राहुल ने फाड़ा अध्यादेश

इससे पहले एक दिलचस्प किस्सा जान लीजिए, क्योंकि शायद अगर राहुल गांधी ने 9 साल पहले वो अध्यादेश नहीं फाड़ा होता, तो आज उन्हें राहत मिल जाती। दरअसल लिली थॉमस बनाम भारत सरकार मामले में एक मिसाल कायम की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में फैसला सुनाया कि कम से कम दो साल के लिए दोषी ठहराए जाने पर सांसदों समेत सांसदों की सदस्यता तुरंत खत्म हो जाएगी।

2013 में, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने फैसले को पलटने और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (4) को बनाए रखने की कोशिश की, जिसके तहत सांसदों को दोषी ठहराए जाने पर भी तीन महीने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था।

मगर तब खुद राहुल गांधी ने इस अध्यादेश को पूरी तरह से बकवास करार दिया था। उन्होंने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ये अध्यादेश पूरी तरह बकवास है, इसे फाड़ कर फेंक दिया जाना चाहिए।" इतना कहते ही राहुल ने उस अध्यादेश को फाड़ दिया था।

ये किस्सा सुनाने का मतलब यही था कि ये वो ही अध्यादेश था, जिसे शायद उस समय राहुल गांधी ने नहीं फाड़ा होता, तो आज दोषी करार दिए जाने पर सांसदों को अपने सदस्यता खोने से तीन महीने तक राहत मिल जाती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

Hindustan Times के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के वकील उपमन्यु हजारिका ने तर्क दिया कि सूरत की अदालत के फैसले में अहम कारक ये है कि गांधी की दो साल की कैद और 15,000 रुपए के जुर्माने को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।

हजारिका ने कहा, "एक सजा निलंबित का मतलब है कि गांधी को दोषी पाया गया है, लेकिन उनकी सजा तुरंत लागू नहीं होगी।" उन्होंने कहा, “ये 30 दिन गांधी के लिए बेहद अहम होंगे। अगर हाई कोर्ट सूरत जिला अदालत के आदेश पर रोक लगाती है या रद्द करती है, तो ही वह सांसद बने रह पाएंगे।"

सुप्रीम कोर्ट के एक दूसरे वकील मुहम्मद खान ने कहा कि गांधी और कांग्रेस की कानूनी टीम सूरत की अदालत के आदेश पर रोक लगाने में कोई समय बर्बाद नहीं करने जा रही है। ऐसे मामलों में अपीलीय अदालत हमेशा सत्र एक होती है, जिसका मतलब है कि गांधी खुद हाई कोर्ट में अपील नहीं कर सकते।

क्या था ये मामला?

ये फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। उनके खिलाफ ये मामला उनकी उस टिप्पणी को लेकर दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था, "सभी चोरों का सरनेम मोदी ही कैसे है?" राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

वायनाड से लोकसभा सदस्य गांधी ने ये कथित टिप्पणी 2019 के आम चुनाव से पहले कर्नाटक के कोलार में आयोजित जनसभा में की थी।

'मोदी सरनेम' मानहानि मामले में राहुल गांधी को 2 जेल कैद की सजा, तुरंत मिली जमानत, सूरत कोर्ट ने सुनाया फैसला

शिकायतकर्ता और सूरत पश्चिम से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूर्णेश मोदी ने कहा कि वह इस फैसले का स्वागत करते हैं।

गुजरात हाई कोर्ट ने गांधी की व्यक्तिगत उपस्थिति का अनुरोध करने वाली शिकायतकर्ता की याचिका पर लगाई गई रोक हटा ली थी, जिसके बाद पिछले महीने इस मामले में आखिरी बहस दोबारा शुरू हुईं।

'राहुल सच बोलते रहेंगे'

वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले पर कहा कि वह कानून में विश्वास करती है और ये लड़ाई कानून के तहत ही लड़ी जाएगी और उसके पूर्व अध्यक्ष बिना डरे सच बोलते रहेंगे।

अदालत की तरफ से सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के एक कथन का हवाला देते हुए ट्वीट किया, "मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।"

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद भवन में मीडिया से कहा, "हमको पहले से अंदाजा लग रहा था, लेकिन हम कानून और न्यायपालिका में विश्वास रखने वाले हैं और कानून के तहत लड़ेंगे।"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि राहुल गांधी की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह सच बोलते रहेंगे।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘डरी हुई सत्ता की पूरी मशीनरी साम, दाम, दंड, भेद लगाकर राहुल गांधी जी की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। मेरे भाई न कभी डरे हैं, न कभी डरेंगे। सच बोलते हुए जिए हैं, सच बोलते रहेंगे। देश के लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। सच्चाई की ताकत व करोड़ों देशवासियों का प्यार उनके साथ है।"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।