राहुल गांधी क्या 8 साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव? मानहानि मामले में दो साल की सजा के बाद गई सांसदी, जानें क्या कहता है नियम
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की लोकसभा सदस्यता जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत गई है। इसके तहत दो साल या उससे ज्यादा समय के लिए जेल की सजा पाने वाले व्यक्ति को ‘दोषी ठहराए जाने की तारीख से’ अयोग्य घोषित किया जाएगा और वह सजा पूरी होने के बाद जनप्रतिनिधि बनने के लिए छह साल तक अयोग्य रहेगा, यानी वो 6 साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ...
मानहानि मामले में दो साल की सजा के बाद गई राहुल गांधी की सांसदी
सूरत (Surat) की एक अदालत की तरफ से मानहानि के मामले में सजा सुनाए जाने के मद्देनजर केरल के वायनाड से सांसद रहे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को शुक्रवार को लोकसभा (Lok Sabha) की सदस्यता के लिए अयोग्य (Disqualify) ठहराया गया। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि उनकी अयोग्यता से जुड़ा आदेश 23 मार्च से लागू होगा। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि उन्हें (राहुल गांधी) संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 धारा 8 के तहत अयोग्य घोषित किया गया है।
दरअसल राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत गई है। इसके तहत दो साल या उससे ज्यादा समय के लिए जेल की सजा पाने वाले व्यक्ति को ‘दोषी ठहराए जाने की तारीख से’ अयोग्य घोषित किया जाएगा और वह सजा पूरी होने के बाद जनप्रतिनिधि बनने के लिए छह साल तक अयोग्य रहेगा, यानी वो 6 साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत तकनीकी रूप से राहुल गांधी को दो साल की सजा होने के बाद से ही उन्हें तत्काल लोकसभा से अयोग्य ठहराती है, जब तक कि हाई कोर्ट की तरफ से सजा पर रोक नहीं लगाई जाती है।
इस लिहाज से देखा जाए, तो राहुल गांधी की सजा पर जब तक रोक नहीं लगती है, तब तक वे अगले 8 साल (2+6) तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस मामले पर जब हमने कानून के जानकार और NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ, हैदराबाद के पूर्व कुलपति फैजान मुस्तफा से बात की तो, उनका तर्क था, "क्योंकि राहुल गांधी की सजा पर रोक नहीं लगी है। इसके चलते उन्हें अयोग्य ठहराया गया है।"
ये पूछे जाने पर कि क्या कि कांग्रेस में इतने बड़े-बड़े वकील होने के बाद भी क्या किसी राहुल को राहत के लिए तुरंत हाई कोर्ट जाने की सलाह नहीं दी होगी? फैजान मुस्तफा ने कहा, "हो सकता है कि जजमेंट कॉपी उपलब्ध नहीं हुई हो।"
उन्होंने कहा, "आदेश की सर्टिफाइट कॉपी मिलने में काफी समय लग जाता है और फिर ये तो गुजरात की निचली अदालत का आदेश था। ये गुजराती भाषा में होगा, तो इसका ढंग से अनुवाद करने में भी समय लगता है।"
न लड़ पाएंगे चुनाव, न डाल पाएंगे वोट!
उधर PTI के मुताबिक, लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी. आचारी ने गुरुवार को कहा कि सजा का ऐलान होने के साथ ही अयोग्यता लागू हो जाती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपील करने के लिए स्वतंत्र हैं और अगर अपीलीय अदालत दोष और सजा दोनों पर रोक लगा देती है, तो अयोग्यता भी निलंबित हो जाएगी।
जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया था कि सजा पूरी होने या सजा काटने के बाद अयोग्यता की छह साल की होती है।
आचारी के गुरुवार के बयान के मुताबिक, राहुल गांधी की अयोग्यता आठ साल की होगी। उन्होंने कहा कि अयोग्य घोषित किया गया व्यक्ति न तो चुनाव लड़ सकता है और न ही इस दौरान मतदान कर सकता है।
आचारी का मानना है कि अयोग्यता अकेले दोष सिद्धि से नहीं, बल्कि सजा के कारण भी होती है। उन्होंने कहा, "इसलिए, अगर निचली अदालत की तरफ से ही सजा को निलंबित कर दिया जाता है, तो इसका मतलब है कि उनकी सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अयोग्यता प्रभावी नहीं होगी।"
एजेंसी के मुताबिक, वरिष्ठ वकील और संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने लिलि थॉमस और लोक प्रहरी मामलों में सुप्रीम कोर्ट के साल 2013 और 2018 के फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सांसदों/विधायकों के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्यता से बचने के वास्ते सजा रद्द होने और दोषी करार दिए जाने के फैसले पर स्टे ऑर्डर की जरूरत होती है।
वहीं चुनाव आयोग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी व चुनावी कानून विशेषज्ञ का मानना है कि राहुल गांधी को खुद के दोषी साबित होने पर भी स्टे ऑर्डर की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि सजा का निलंबन दोष सिद्धि के निलंबन से अलग है।
विशेषज्ञ ने कहा, "लिलि थॉमस फैसले के अनुसार, ऐसे दोषी ठहराए गए मामले जिसके, तहत दो साल या उससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है, उसके तहत जनप्रतिनिधि खुद ही अयोग्य हो जाएगा। बाद में लोक प्रहरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अपील करने पर दोष रद्द हो जाता है, तो अयोग्यता भी अपने-आप रद्द हो जाएगी।"
बता दें कि सूरत की एक अदालत ने ‘‘मोदी उपनाम’’ (Modi Surname) से जुड़े बयान को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के एक मामले में उन्हें बृहस्पतिवार को दो साल कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने, हालांकि गांधी को जमानत भी दे दी और उनकी सजा के अमल पर 30 दिनों तक के लिए रोक लगा दी, ताकि कांग्रेस नेता फैसले को चुनौती दे सकें।