Mahakumbh 2025 : कुंभ में कल्पवास और नाम रखा कमला...कौन हैं अरबपति लॉरेन पॉवेल जिनकी है काफी चर्चा

प्रयागराज में महाकुंभ सोमवार (13 जनवरी) से शुरू होगा, लेकिन उससे पहले ही यहां पर बड़ी संख्या में देश विदेश से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। इसी कड़ी में एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेल पावेल जॉब्स महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए प्रयागराज पहुंच चुकी हैं

अपडेटेड Jan 12, 2025 पर 7:25 PM
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कौन हैं लॉरेल पावेल जिनकी है काफी चर्चा

Mahakumbh 2025 : प्रयागराज में होने जा रहे महाकुंभ का काउंटडाउन शुरु हो गया है। अब से कुछ ही घंटों बाद हिंदू धर्म के आस्था का महापर्व की शुरुआत हो जाएगी। महाकुंभ में इस बार 40 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने का अनुमान है। कुंभ में शामिल होने के लिए देश से कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी काफी संख्या में लोग आ रहे हैं। वहीं इस महापर्व का साक्षी बनने के लिए एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी प्रयागराज पहुंच चुकी हैं।

काशी से शुरु की धार्मिक यात्रा

बता दें कि लॉरेल पावेल, प्रयागराज पहुंचने से पहले शनिवार को वाराणसी पहुंची और काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किया। काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के साथ उन्होंने भारत की अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत की। वहीं रविवार को लॉरेन पॉवेल  संगम नगरी प्रयागराज पहुंच चुकी हैं। लॉरेन पॉवेल , महाकुंभ में कल्पवास भी करेंगी। महाकुंभ में वह श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के शिविर में 10 दिनों तक रुकेंगी। सनातन से प्रभावित पॉवेल शिविर में योग, ध्यान और आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेंगी।


कौन हैं लॉरेल पावेल

मालूम हो कि स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल खुद एक अरबपति हैं। 11 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ, लॉरेन पॉवेल जॉब्स सिलिकॉन वैली की सबसे धनी महिला हैं। 2011 में जॉब्स की मृत्यु के बाद, पॉवेल को स्टीवन पी जॉब्स ट्रस्ट विरासत में मिला। लॉरेन पॉवेल महाकुंभ में शामिल होने के लिए प्रयागराज आई हैं और यहां वह तप, ध्यान और योग करेंगी। शनिवार को आध्यात्मिक गुरु कैलाशानंद महाराज ने यह जानकारी दी कि लॉरेन पावेल यह दूसरी बार भारत आई हैं। इस बार उन्हें हिंदू नाम ‘कमला’ दिया जाएगा और उनका गोत्र भी गुरु द्वारा तय किया जाएगा। कैलाशानंद महाराज ने बताया कि यह लॉरेन पावेल का निजी कार्यक्रम है और वह पूरी तरह से आध्यात्मिक उद्देश्य से भारत आई हैं। स्टीव जॉब्स को बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाबा नीम करौली में स्टीव की अगाध आस्था थी। वह उन्हें अपना गुरु मानते थे।

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