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Ram Mandir: राम मंदिर आंदोलन के इन गुमनाम नायकों को जानते हैं आप: पिंगले, कोठारी बंधु, योद्धा साधु!

Ram Mandir: राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद को हटाकर भव्य मंदिर निर्माण का राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन सही मायने में 1983 से शुरू हुआ। इस आंदोलन में ऐसे असंख्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और न ही सामयिक संदर्भों में कोई चर्चा होती है। इनमें से कुछ ऐसे ही गुमनाम नायकों के बारे में इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 25, 2023 पर 7:25 PM
Ram Mandir: राम मंदिर आंदोलन के इन गुमनाम नायकों को जानते हैं आप: पिंगले, कोठारी बंधु, योद्धा साधु!
Ram Mandir: राम मंदिर आंदोलन के इन गुमनाम नायकों को जानते हैं आप: पिंगले, कोठारी बंधु, योद्धा साधु!

लेख: अरुण आनंद

Ram Mandir: अयोध्या (Ayodhya) में 22 जनवरी को राम जन्मभूमि (Ram Janmbhoomi) पर राम लला प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इस प्राण प्रतिष्ठा को लगभग 500 साल के आंदोलन की परिणति कहा जा सकता है। 1528 में एक सूफी मूसा आशिकान के कहने पर बाबर ने अयोध्या में अपने सेनापति मीर बाकी के माध्यम से रामजन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई, जिसे बाद में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया। वैसे तो राम जन्मभूमि का आंदोलन 1528 से शुरू हो गया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद पहली बार 1949 के आस-पास फिर थोड़ी ज्यादा हलचल हुई, जब वहां राम लला की मूर्ति का प्रकटीकरण हुआ। लेकिन देश भर में यह आंदोलन तब भी नहीं फैला था। राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद को हटाकर भव्य मंदिर निर्माण का राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन सही मायने में 1983 से शुरू हुआ। इस आंदोलन में ऐसे असंख्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और न ही सामयिक संदर्भों में कोई चर्चा होती है। इनमें से कुछ ऐसे ही गुमनाम नायकों के बारे में इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे।

मोरोपंत पिंगले

मोरेश्वर नीलकंठ पिंगले, जिन्हें मोरोपंत पिंगले के नाम से जाना जाता है, नागपुर के मॉरिस कॉलेज से स्नातक थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक (पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे। पिंगले 'अदृश्य' रणनीतिकार थे, जिन्होंने शुरुआत से ही इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन के तहत सभी प्रमुख 'यात्राएं' और देशव्यापी अभियान, जिनमें 'शिला पूजन' कार्यक्रम भी शामिल है, जिसके तहत पूरे देश से 3 लाख से ज्यादा ईंटें अयोध्या भेजी गईं, उनकी रणनीति तैयार करने में पिंगले की अहम भूमिका थी।

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