Ram Mandir Inaugration: अयोध्या (Ayodhya) के श्रीराम मंदिर (Ram Mandir) के भव्य उद्घाटन में एक महीने से भी कम समय बचा है। श्रीराम मंदिर परिसर के लिए जरूरी लकड़ी के सारे काम पूरा करने के लिए हैदराबाद की बढ़ईगीरी और लकड़ी कंपनी अनुराधा टिंबर्स इंटरनेशनल में दिन-रात काम चल रहा है। खास सागौन की लकड़ी (Teak Wood) से मंदिर के दरवाजे और खड़कियों को बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं स्थानीय लोग उस साइट पर पहुंच रहे हैं, जहां राम मंदिर का लकड़ी का काम चल रहा है। लोग यहां लकड़ियों पर की जा रही खास तरह की नक्काशी और डिजाइन को देखने पहुंच रहे।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, एक स्थानीय राघवेंद्र भी अपने बच्चों को इस साइट पर घुमाने लेकर आए। इस दौरान उन्होंने कहा, "आज मैं ये जगह देखने के लिए आया हूं। इन मूर्तियों की कला वास्तव में बेहतरीन है। मैं अपने बच्चों को डिजाइन समझा रहा हूं। बच्चे भी इस कला को देखकर बेहद उत्साहित हैं। मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि हमारे गांव की लकड़ी का काम अयोध्या के राम मंदिर में हो रहा है।"
यहां जटिल और सटीक नक्काशी वाले 100 से ज्यादा दरवाजे बने हैं। कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर बताते हैं कि वे इस काम के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अनुराधा टिंबर्स के मालिक सरथ बाबू, बताते हैं, "अयोध्या के राम मंदिर परिसर परिसर के लिए हम जरूरी दरवाजों और लकड़ी के दूसरे सामानों का काम कर रहे हैं। हम बलारशाह की सागौन की लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम बेहद उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, 100 टुकड़ों में हम उच्च गुणवत्ता वाले 20 टुकड़ों का चुनाव करते हैं। इस पर सिर्फ जानकार कारीगर ही काम कर रहे हैं।"
बता दें कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
News18 के मुताबिक, सरथ बाबू समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए जून से अयोध्या और हैदराबाद के बीच यात्रा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया था, "हम सागौन की लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो 3,000 सालों तक चलने के लिए जानी जाती है। निस्संदेह, हमें ऐसे प्रोजेक्ट के लिए सर्वोत्तम लकड़ी का चयन करना होगा। कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद, हमने महाराष्ट्र के बल्हारशाह जंगल से सबसे बेहतरीन क्वालिटी वाले पेड़ चुने।"
सरथ ने बताया, "पेड़ों की औसत उम्र 100 साल है और देखने में उनमें कोई कमी नहीं थी। हमने यह सुनिश्चित किया कि कोई दरारें, गांठें या रसभरी लकड़ी न रहे। इन पेड़ों को फिर से सिलेक्शन की एक कठोर प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और उनसे इकट्ठा की गई लकड़ी का केवल 20% हिस्सा मंदिर के अंदर वाले परिसर के लिए इस्तेमाल करने के लिए चुना गया था। सागौन की लकड़ी का मौसम और दीमका का असर नहीं होता है।"