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कलयुग की माता शबरी हैं सरस्वती देवी, राम मंदिर के इंतजार में 30 सालों से रखा मौन व्रत, अब प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन तोड़ेंगे प्रण

Ram Mandir Inauguration: ये सच्ची कहानी धनबाद की सरस्वती अग्रवाल (Saraswati Aggarwal) की है। करमटांड़ की रहने वालीं 85 साल की सरस्वती अग्रवाल ने 30 साल पहले मौन व्रत का संकल्प लिया था और प्रण किया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन जाता, वह कभी नहीं बोलेंगी। प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती अग्रवाल का ज्यादातर वक्त अयोध्या में ही बीतता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 08, 2024 पर 6:06 PM
कलयुग की माता शबरी हैं सरस्वती देवी, राम मंदिर के इंतजार में 30 सालों से रखा मौन व्रत, अब प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन तोड़ेंगे प्रण
कलयुग की माता शबरी हैं सरस्वती देवी, राम मंदिर के इंतजार में 30 सालों से रखा मौन व्रत, अब प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन तोड़ेंगे प्रण

Ram Mandir Inauguration: 'मीठे फल चख कर नित्य सजाए थारी, रास्ता देखत सबरी की उमर गई सारी...' इन पंक्तियों में माता शबरी की भगवान राम के प्रति सच्ची भक्ति और प्रभु के दर्शन के इंतजार में बिताए पूरे जीवन के बारे में बताया गया है। जिस तरह त्रेता युग की शबरी ने भगवान की झलक पाने के लिए उम्र भर इंतजार किया और आखिरकार प्रभु भी उनकी कुटिया में आए, उसी तरह इस कलयुग में भी एक शबरी की कहानी सामने आई है, जिन्होंने अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) बनने के इंतजार में 30 साल से मौन व्रत धारण किया हुआ है।

दरअसल ये सच्ची कहानी धनबाद की सरस्वती अग्रवाल (Saraswati Aggarwal) की है। करमटांड़ की रहने वालीं 85 साल की सरस्वती अग्रवाल ने 30 साल पहले मौन व्रत का संकल्प लिया था और प्रण किया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन जाता, वह कभी नहीं बोलेंगी। हालांकि, अब उनका ये इंतजार और मौन व्रत दोनों ही 22 जनवरी को अयोध्या में जाकर खत्म हो जाएंगे।

पति ने दिया अक्षर ज्ञान

प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती अग्रवाल का ज्यादातर वक्त अयोध्या में ही बीतता है। 22 जनवरी को भी वह राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन ‘राम, सीताराम’ कहकर ही अपना मौन व्रत तोड़ेंगी।

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