Ram Mandir: हर कोई उस इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटते देखना चाहता है जो अयोध्या में रचने जा रहा है। वह भी अयोध्या में रह कर। उस पल को अपनी आंखों में कैद करने की विकलता है। यह जानने की उत्कंठा भी की उस परिसर तक कैसे जा सकते हैं जहां पर प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। अब तो बाहर से आने वालों से पूछताछ भी शुरू हो चुकी है। सभी सुरक्षा इकाइयां अयोध्या में डेरा डाल चुकी है। रात दिन हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था सबसे कठिन चुनौती है जिसे सुरक्षा इकाइयां बखूबी निभा रही है।
जो भी गाड़ियां बाहर से आ रही है उनकी जांच पड़ताल हो रही है। लेकिन श्रद्धालुओं को इससे कोई मतलब नहीं। ना ही उन्हें इसकी कोई परवाह है। आने वाले श्रद्धालुओं में कई अपनी तमाम चिंताओं को किनारे रख कर आए हैं और यहां मंदिर मंदिर घूम कर दर्शन कर रहे हैं । रास्ते चलते भोजन पानी की व्यवस्था है। मकर संक्रांति कल है लेकिन आज से ही तमाम भंडारों में खिचड़ी और पूरी बट रही है। उसी का स्वाद ले रहे हैं और भगवान के दर्शन का आनंद। रहने के लिए अस्थाई बसेरे भी है। सैकड़ो की संख्या में आश्रम है जहा श्रद्धालु ठहरे है।
दर्शन के बाद राम नाम और महिमा पर चर्चा। बिहार से आए दिनेश यादव कहते है कि पांच सौ साल का वह लंबा इतिहास है । राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया और इसको लेकर लगातार संघर्ष भी चला। अब तो उस पल का इंतजार कर रहा हूं जब उस स्थान पर फिर राम मंदिर का निर्माण हो गया है और उस विशाल मंदिर में भगवान राम पधारने वाले हैं।
राम लला भव्य मन्दिर में उसी स्थान पर विराजेगे जहां पांच सौ साल पहले थे। इस लिए पूरे अयोध्या में इस बात को लेकर उत्सुकता है की कौन इस पावन भूमि में रह इतिहास को अपनी आंखों से घटते देखेगा , जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। यह संकल्प और उत्सुकता प्रशासन के लिए सबसे कठिन चुनौती भी बन गई है। अयोध्या पर भीड़ का दबाव बढ़ता जा रहा है। कोई यहां से हटना नहीं चाहता। बड़ी संख्या में लोग अयोध्या में ही रह कर पूजन अनुष्ठान कर रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह की प्रतीक्षा भी। तमाम हवन पूजन अनुष्ठान अयोध्या में चल रहे हैं।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में 6000 लोगों को आमंत्रित किया है लेकिन अतिथियों को संख्या बढ़ सकती हैं। कुछ नए नाम जोड़े घटाए जा रहे है। सरकार और प्रशासन द्वारा आने वाले दिनों में बाहरी लोगो को अयोध्या में प्रवेश को रोका जा सकता है विशेष रूप से रामकोट और हनुमान गढ़ी क्षेत्र में। लेकिन जो अयोध्या के अंदर श्रद्धालु रह रहे हैं उन्हें बाहर भेजना कठिन है। वैसे 22 जनवरी के पहले राम जन्मभूमि और हनुमानगढ़ क्षेत्र को खाली करा कर पूरी सील कर दिया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है।
महाराष्ट्र से आए जितेंद्र चह्वाण कहते हैं कि अयोध्या मे रहकर ही उस पल का आनंद लेना चाहता हूं जब प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। उनके साथ आए हुए लोग कहते हैं कि कोई जरूरी नहीं कि हम लोग जन्म भूमि परिसर में रहे। हम सभी की बस इच्छा यही है कि जब भगवान राम पधारे तो हम अयोध्या की धरती पर ही हो। मैं तो रहूंगा अयोध्या की पवित्र धरती में ही और फिर उनकी आने वाली पीढ़ियां यह बताएंगी कि जब मंदिर निर्माण हुआ था तब हमारे पूर्वज अयोध्या में ही थे। वैसे तो न सिर्फ पूरा देश बल्कि विभिन्न देशों में रह रहे हिंदू समुदाय के लोग उस पल की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। लेकिन सरकार और प्रशासन के तमाम अनुरोध के बावजूद बहुत से जो लोग अयोध्या छोड़ना नहीं चाहते उनके अपने तर्क और आस्था है। उनकी इच्छा यही है की अपनी उपस्थिति में इतिहास को बदलते देखे।
मध्यप्रदेश से आए दीना नाथ कहते हैं की वास्तव उस लड़ाई का समापन भी देखना चाहते है जो 500 साल पहले शुरू हुई थी। असम से आए शरद गोस्वामी कहते हैं कि यह दुनिया में कहीं नहीं देखा गया की अपने आराध्य की जन्म भूमि को फिर से पाने के लिए किसी देश और समुदाय ने इतनी लंबी लड़ाई लड़ी हो। लोग विपरीत परिस्थितियों में भी यह दावा करते रहे की यह जन्म भूमि उनके आराध्य की है इसे वापस दिया जाए और आज वह पल भी आ गया है । यह इतिहास की वह रचना है जो कभी कभार होती है और फिर अपने तमाम संदेश और संकेत छोड़कर पन्नों में दर्ज हो जाती है। इस लिए वे अयोध्या में रहकर इसे क्यों न देखे।
उत्तर प्रदेश के बदायूं से आए राम सुमिरन मौर्य भी कहते हैं कि अयोध्या मे रहकर ही उस पल का आनंद लेना चाहता हूं जब प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। उनके साथ आए हुए लोग कहते हैं कि कोई जरूरी नहीं कि हम लोग जन्म भूमि परिसर में रहे। हम सभी की बस इच्छा यही है कि जब भगवान राम पधारे तो हम अयोध्या की धरती पर ही हो। सभी की इच्छा यही है कि वे इतिहास को बदलते अयोध्या की धरती पर देखे। इस इतिहास की रचना अयोध्या में ही होगी।