भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बल्क डिपॉजिट की परिभाषा में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका असर सामान्य बैंकों और छोटे वित्त बैंक (SFB)दोनों पर पड़ेगा। हालांकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को इससे बाहर रखा जाएगा। नए प्रस्ताव के मुताबिक, 3 करोड़ से ऊपर के डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट मानने की सिफारिश की गई है। यानी बल्क डिपॉजिट की लिमिट बढ़ा दी जाएगी। बता दें कि बल्क डिपॉजिट का मतलब बैंकों में एक बार में जमा की जाने वाली राशि से होता है। बल्क डिपॉजिट की लिमिट वो सीमा होती है, जिस सीमा से ज्यादा धन राशि एक बार में जमा नहीं की जा सकती। इस एडजस्टमेंट का उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर में अहम जमाराशियों के वर्गीकरण को सुव्यवस्थित करना है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की वेबसाइट से पता चलता है कि वर्तमान में बल्क डिपॉजिट की लिमिट ₹2 करोड़ है। अब RBI के प्रस्ताव के बाद वित्त मंत्रालय का अप्रूवल मिलते ही ये लिमिट 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दी जाएगी। बैंकों को फंड जुटाने में ऑपरेशनल फ्रीडम देने के लिए ये कदम उठाया गया है।
इस पर आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को अपनी जरूरतों और असेट लाइबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) अनुमानों के मुताबिक थोक जमा पर ब्याज की अलग-अलग दरें तय करने का विवेकाधिकार है।" यह कदम बैंकिंग रेग्युलेशनों को उभरते बाजार स्थितियों के अनुकूल बनाने के चल रहे प्रयासों के एक हिस्से के रूप में उठाया गया है।
एक्सिस बैंक के डिप्टी एमडी राजीव आनंद ने बल्क डिपॉजिट की लिमिट में बढ़त पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि बल्क डिपॉजिट को 2 करोड़ रुपये से बढ़ा 3 करोड़ रुपये तक करने का कदम इस समय कोई खास महत्व रखता है। यह केवल परिभाषा का मुद्दा है। इससे डिपॉजिट या क्रेडिट ग्रोथ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
यूको बैंक के एमडी और सीईओ अश्विनी कुमार ने बल्क डिपॉजिट लिमिट में बढ़त पर बात करते हुए कहा, "जहां तक बल्क डिपॉजिट का सवाल है, यह एक सुधार है। अब केवल ₹3 करोड़ से कम की कोई भी जमा राशि रिटेल टर्म डिपॉजिट के रूप में क्लासीफाई की जाएगी, और ₹3 करोड़ से अधिक की जमा राशि को बल्क डिपॉजिट के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि इस बदलाव से डिपॉजिट जुटाने या संसाधन जुटाने के प्रयासों पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
इससे पहले वर्ष 2019 में बल्क डिपॉजिट की लिमिट बढ़ाई गई थी। उससे पहले 1 करोड़ से ज्यादा राशि को बल्क डिपॉजिट माना जाता था। यानी बैंकों में एकमुश्त जमा की जाने वाली राशि की लिमिट 1 करोड़ रुपये थी। फरवरी 2019 में ये लिमिट बढ़ा कर 2 करोड़ रुपये कर दी गई थी। फरवरी 2019 से पहले जनवरी 2013 में बल्क डिपॉजिट लिमिट को लेकर रिव्यू किया गया था. उस समय 1 करोड़ रुपये और उससे अधिक रकम को बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में रखा गया था।