भारतीय रिजर्व बैंक (The Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Governor, Shaktikanta Das) ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली अभी लचीली और स्थिर है। साथ ही, उन्होंने बैंकों को संपत्ति-देयता असंतुलन (asset-liability mismatches) बनने के खिलाफ चेतावनी भी दी। गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार 17 मार्च को कोच्चि में फेडरल बैंक के संस्थापक केपी होर्मिस (KP Hormis) के स्मारक व्याख्यान में बोल रहे थे। शउन्होंने कहा घरेलू वित्तीय क्षेत्र स्थिर है और मुद्रास्फीति का सबसे बुरा दौर पीछे छूट गया है। गवर्नर ने कहा कि अमेरिकी बैंकिंग संकट ने मजबूत नियमों के महत्व को साबित कर दिया है। जो स्थायी विकास पर फोकस करते हैं। इसके साथ ही संपत्ति पक्ष या देयता पक्ष पर अत्यधिक बिल्ड अप को रोकते हैं।
गवर्नर ने कहा, "हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि हमारा विदेशी ऋण प्रबंधनीय (कंट्रोल में) है। इसलिए ग्रीनबैक की वृद्धि हमारे लिए कोई समस्या पैदा नहीं करती है।"
दास ने कहा कि आरबीआई के सुपरवाइजरी सिस्टम्स को हाल के वर्षों में उपायों के माध्यम से काफी मजबूत किया गया है। जिसमें वाणिज्यिक बैंकों, एनबीएफसी और यूसीबी के लिए एक एकीकृत और सुसंगत सुपरवाइजरी दृष्टिकोण शामिल है। ऑन-साइट सुपरवाइजरी की आवृत्ति और तीव्रता अब संस्थानों के आकार और जोखिम पर आधारित है।
गवर्नर ने अपना अधिकांश भाषण भारत के G20 प्रेसीडेंसी पर फोकस किया। इस संदर्भ में, उन्होंने दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह द्वारा अमेरिकी डॉलर में वृद्धि के कारण उच्च विदेशी ऋण जोखिम वाले देशों की मदद करने के लिए मिलजुल कर और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।
यूएस बैंक का नाम लिए बिना, दास ने कहा कि उनमें से एक के पास अपनी एसेट साइड कारोबार से अधिक अनमैनेजेबल डिपॉजिट्स था। उन्होंने आगे कहा कि जारी अमेरिकी बैंकिंग संकट स्पष्ट रूप से वित्तीय प्रणाली के लिए प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के जोखिमों को दर्शाते हैं।
गवर्नर ने कहा कि साइबर लचीलेपन को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने बैंकों के लिए एक व्यापक साइबर सुरक्षा ढांचा जारी किया है। इसके साथ डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रण दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।