Red Fort Attack Case: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वर्ष 2000 के लाल किला हमला मामले में दोषी लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के आतंकी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक (Mohammad Arif alias Ashfaq) की मौत की सजा को बरकरार रखा है। आपको बता दें कि आरिफ, लाल किले पर 22 दिसंबर 2000 को किए गए आतंकवादी हमले के दोषियों में से एक है। हमले में सेना के दो जवानों सहित तीन लोग मारे गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ की उस याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 2000 के लाल किला हमले के मामले में मौत की सजा देने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) उदय उमेश ललित और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की एक पीठ ने कहा कि उसने ‘इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड' पर विचार करने के आवेदन को स्वीकार किया है। वह दोषी साबित हुआ है। हम इस अदालत द्वारा किए गए फैसले को बरकरार रखते हैं और पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं।
2005 में सुनाई गई थी फांसी की सजा
हमले के मास्टरमाइंड के दोषी पाकिस्तानी आतंकी आरिफ को 2005 में दिल्ली की एक निचली अदालत ने मौत की सजा दी थी। 31 अक्टूबर 2005 को निचली अदालत ने आरिफ को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, दिल्ली हाई कोर्ट ने 2007 में उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा था।
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2011 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की क्यूरेटिव याचिका भी खारिज कर दी थी। आरिफ की समीक्षा याचिका को पहले खुली अदालत में सुनवाई के बिना खारिज कर दिया गया था। उसके बाद अब एक बार फिर शीर्ष अदालत ने दोषी की सजा को लेकर दायर की गई पुनर्विचार को भी खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
शीर्ष अदालत ने इस मामले में साल 2015 में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। दरअसल, इससे पहले पुनर्विचार याचिका की सुनवाई जज अपने चैम्बर में करते थे। लेकिन 2015 में आतंकी याकूब मेमन और मोहम्मद आरिफ की याचिका ओपन कोर्ट में सुनी थी। यह अपने आप में पहला मामला था, जिसमें फांसी की सा पाए किसी दोषी की पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर दोबारा सुनवाई की।