डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड लो लेवल पर आ गया है। 6 फरवरी को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे गिरकर 87.57 पर आ गया। 5 फरवरी को भी रुपये में बड़ी गिरावट आई थी। यह 36 पैसे गिरा था। आरबीआई 7 फरवरी को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में 0.25 फीसदी की कमी करेगा। यह बीते 5 साल में रेपो रेट में पहली कमी होगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टॉक मार्केट (Stock Markets) में विदेशी फंडों (Foreign Funds) की बिकवाली जारी है। इससे रुपये (Rupee) पर दबाव बढ़ रहा है। दूसरा, डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिकी सरकार की पॉलिसी बदली है। खासकर ट्रैरिफ को लेकर अमेरिका की पॉलिसी में बदलाव आया है। इसका असर डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) पर पड़ा है। दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर (Dollar) में मजबूती आई है। इसके चलते भी रुपये पर दबाव बढ़ा है। 6 फरवरी को डॉलर इंडेक्स 0.11 फीसदी चढ़कर 107.69 पर चल रहा था।
क्यों डॉलर खरीद रहे इंपोर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपया दबाव में चल रहा है, क्योंकि विदेशी बैंक डॉलर खरीद रहे हैं। इंपोर्ट्स को भी डॉलर के और मजबूत होने के आसार लग रहे हैं, जिससे वे डॉलर खरीद रहे हैं। उधर, स्टॉक मार्केट्स में विदेशी फंडों (FIIs) की बिकवाली जारी है। 5 फरवरी को उन्होंने 1,682.83 करोड़ रुपये की बिकवाली की। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक विदेशी फंडों की बिकवाली जारी रहेगी, रुपये पर दबाव बना रहेगा।
क्या RBI हस्तक्षेप करेगा?
सवाल है कि क्या RBI 7 फरवरी को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रुपये को गिरने से बचाने के लिए उपायों का ऐलान करेगा? पिछले कुछ समय से केंद्रीय बैंक ने रुपये में कमजोरी बढ़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप की अपनी पॉलिसी बदली है। आम तौर पर रुपये को गिरने से बचाने के लिए आरबीआई डॉलर बेचता है। लेकिन, इसका व्यापक असर पड़ता है। इसके डॉलर की जमाखोरी को भी बढ़ावा मिलता है। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ता है।
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क्या क्रेडिट पॉलिसी में कोई ऐलान होगा?
आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल में सावधानी बरतना चाहता है। ग्लोबल मार्केट्स में अनिश्चितता की स्थिति है। अगर डॉलर इंडेक्स में मजबूती जारी रहती है तो इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। तब आरबीआई को रुपये को गिरने से बचाने के लिए हस्तक्षेप करने को मजबूर होना पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल इस बात की कम उम्मीद है कि आरबीआई रुपये को गिरने से बचाने के लिए सीधे तौर पर हस्तक्षेप करेगा।