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'शराब का मामला, कंट्रोल न खोएं!', सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिया इंडस्ट्रियल शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने बुधवार 23 अक्टूबर को कहा कि राज्य सरकारों के पास इंडस्ट्रियल शराब को रेगुलेट करने और उस पर टैक्स लगाने का अधिकार है। बेंच ने 8:1 के बहुमत से राज्य सरकारों के पक्ष में फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अपने और सात अन्य जजों की ओर से यह फैसला लिखा। चीफ जस्टिस ने कहा कि केंद्र सरकार के पास इंडस्ट्रियल शराब पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Oct 23, 2024 पर 12:39 PM
'शराब का मामला, कंट्रोल न खोएं!', सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिया इंडस्ट्रियल शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पहले की 7 जजों की बेंच के फैसले को उलटता है

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने बुधवार 23 अक्टूबर को कहा कि राज्य सरकारों के पास इंडस्ट्रियल शराब को रेगुलेट करने और उस पर टैक्स लगाने का अधिकार है। बेंच ने 8:1 के बहुमत से राज्य सरकारों के पक्ष में फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अपने और सात अन्य जजों की ओर से यह फैसला लिखा। चीफ जस्टिस ने कहा कि केंद्र सरकार के पास इंडस्ट्रियल शराब पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है। हालांकि, बेंच में अकेले जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस फैसले के खिलाफ असहमति जताई।

फैसले के दौरान एक हल्के मूड में, जस्टिस रॉय ने मुस्कराते हुए कहा कि चूंकि यह मामला शराब से जुड़ा है, इसलिए जीतने वाले पक्ष के लिए अब "हैप्पी आवर" शुरू हो गया है, लेकिन उन्हें कंट्रोल नहीं खोना चाहिए। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने जवाब दिया कि शराब दोनों पक्षों के लिए रामबाण है– जीतने और हारने वाले दोनों के लिए।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पहले की 7 जजों की बेंच के फैसले को उलटता है, जिसमें कहा गया था कि इंडस्ट्रियल शराब के उत्पादन पर नियंत्रण का अधिकार केंद्र सरकार को है। यह मामला 2010 में नौ जजों की बेंच को सौंपा गया था।

यह मामला 1999 में शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने होलसेल वेंडर्स की ओर से बेची जाने वाली इंडस्ट्रियल शराब पर 50% एड वेलोरेम फीस लगाने का फैसला किया। इस टैक्स को यह कहकर चुनौती दी गई थी कि राज्य सरकार के पास औद्योगिक शराब पर टैक्स लगाने और नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है।

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