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अरविंद केजरीवाल अंतरिम जमानत पर रिहा हुए हैं, रेगुलर पर नहीं; वकील बोले- यह आदेश नहीं बन सकता कानूनी मिसाल

10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को यह कहकर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दे दी कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह समाज के लिए खतरा नहीं हैं। 9 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल को राहत देने का विरोध करते हुए हलफनामा दायर किया था।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 11, 2024 पर 10:59 PM
अरविंद केजरीवाल अंतरिम जमानत पर रिहा हुए हैं, रेगुलर पर नहीं; वकील बोले- यह आदेश नहीं बन सकता कानूनी मिसाल
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दी है।

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तिहाड़ जेल से रिहा हो चुके हैं। लेकिन उनकी यह रिहाई कुछ ही दिनों के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दी है। 2 जून से उन्हें फिर जेल जाना होगा। सीनियर एडवोकेट्स ने मनीकंट्रोल को बताया कि केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानूनी मिसाल नहीं बन सकता है क्योंकि यह केवल एक अंतरिम आदेश है।

सीनियर एडवोकेट और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) संजय जैन का कहना है, “यह केवल एक अंतरिम आदेश है, जो कानून के किसी भी प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लेता है, आपराधिक न्यायशास्त्र के किसी भी ​एलिमेंट को कम छेड़ता है। यह राजनेताओं को एक अलग वर्ग घोषित नहीं करता।”

10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को यह कहकर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दे दी कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह समाज के लिए खतरा नहीं हैं। 9 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल को राहत देने का विरोध करते हुए हलफनामा दायर किया था। ईडी ने कहा कि समानता के आधार पर हम एक छोटे किसान या छोटे व्यापारी के काम को केजरीवाल के पेशे से निचले पायदान पर नहीं रख सकते। इसलिए, उन्हें अंतरिम जमानत देना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। केजरीवाल को ईडी ने 21 मई को गिरफ्तार किया था।

हर दिन पारित किए जाने वाले कई दूसरे आदेशों की तरह है यह आदेश

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