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Train Speed: ट्रेन की रफ्तार किस जगह पर कितनी रखनी है? जानिए लोको पायलट को कैसे चलता है पता

Train Speed: रेलवे के सफर में अगर कभी मन में यह सवाल उठे कि ट्रेन किसके कंट्रोल में चलती है? लोको पायलट गियर बदलकर ट्रेन की स्पीड को कम ज्यादा करते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर लोको पायलट को कैसे पता चलता होगा कि उन्हें ट्रेन की स्पीड कब तेज करना है और कब धीमी करना है

Edited By: Jitendra Singhअपडेटेड May 17, 2023 पर 1:05 PM
Train Speed: ट्रेन की रफ्तार किस जगह पर कितनी रखनी है? जानिए लोको पायलट को कैसे चलता है पता
येलो सिग्नल होने पर ट्रेन की गति को 30 Kmph कर दिया जाता है

Train Speed: भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश की लाइफ लाइन भी मानी जाती है। इंडियन रेलवे रोजाना इतने यात्रियों को यात्रा कराता है। जितनी ऑस्ट्रेलिया की कुल आबादी है। ट्रैक की लंबाई के हिसाब से इंडियन रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है। भारत में कई तरह की ट्रेनें चलती हैं। इनमें पैसेंजर, मेल-एक्सप्रेस, एक्सप्रेस ट्रेन और सुपरफास्‍ट ट्रेन (Superfast Train) शामिल हैं। ट्रेन में स्टेयरिंग भी नहीं होती है। लोको पायलट ट्रेन की स्पीड को कम ज्यादा करता है। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लोको पायलट को कैसे पता चलता है कि ट्रेन की स्पीड किस जगह कितनी रखनी है?

आपने देखा ही होगा कि कई बार ट्रेन अचानक तेज चलने लगती है। फिर थोड़ी ही देर में काफी धीमी हो जाती है। वैसे तो लोको पायलट को जैसे-जैसे सिग्नल मिलते हैं। उसी हिसाब से वो ट्रेन की स्पीड तय करते हैं। लेकिन फिर भी एक सवाल मन में आता ही है कि आखिर सटीक स्पीड कैसे तय की जाती होगी। आइये जानते हैं कि लोको पायलट ट्रेन की स्पीड कैसे तय करते हैं?

ट्रेन की स्पीड कैसे होती है तय?

जब भी ट्रेन किसी सेक्शन में जाती है तो पायलट को पहले से ही टाइम टेबल के साथ स्पीड भी बता दी जाती है। उसी स्पीड से पायलट उस सेक्शन में ट्रेन को चलाएंगे। दूसरी बात ट्रेन की स्पीड को कब अधिकतम और न्यूनतम पर ले जाना है। यह सिग्नल से पता चलता है। ग्रीन सिग्नल होने पर ट्रेन फुल स्पीड से निकल सकती है। वहीं, येलो सिग्नल का मतलब होता है कि स्पीड को कम दें। अगले सिग्नल पर स्टॉप (रेड सिग्नल) मिल सकता है। लोको पायलट को जैसे येलो सिग्नल दिखता है। ट्रेन की स्पीड 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कर देते हैं। वहीं अगर धुंध और कोहरा है तो ऑटोमैटिक सिग्नल वाले रास्ते पर ट्रेन की स्पीड ग्रीन सिग्नल होने पर भी 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए।

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