Chandraayan-3 की सफलता ने बनाया अरबपति, ISRO की कामयाबी पर 60 साल के इस शख्स पर पैसों की बारिश

चांद की सतह पर जैसे ही भारत का चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) उतरा, इसने इतिहास रच दिया। पहली बार कोई देश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा था और चांद की सतह पर उतरने वाला यह चौथा देश बन गया। इसरो (ISRO) की इस कामयाबी ने 60 साल के एक शख्स रमेश कुन्हिकण्णन (Ramesh Kunhikannan) को अरबपति बना दिया। जानिए कौन है यह शख्स और चंद्रयान-3 की सफलता ने उन्हें कैसे अरबपति बनाया?

अपडेटेड Nov 24, 2023 पर 12:00 PM
Kaynes Technology India ने चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर को पावर सप्लाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सप्लाई किया था।

चांद की सतह पर जैसे ही भारत का चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) उतरा, इसने इतिहास रच दिया। पहली बार कोई देश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा था और चांद की सतह पर उतरने वाला यह चौथा देश बन गया। इसरो (ISRO) की इस कामयाबी ने 60 साल के एक शख्स रमेश कुन्हिकण्णन (Ramesh Kunhikannan) को अरबपति बना दिया। यह शख्स है मैसूर में कायन्स टेक्नोलॉजी इंडिया (Kaynes Technology India) का फाउंडर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर। यह वही कंपनी है जिसने चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर को पावर सप्लाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सप्लाई किया था। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मेक इन इंडिया' से इसके कारोबार को तगड़ा सपोर्ट मिला है।

Kaynes Tech के फाउंडर कैसे बने अरबपति

कायन्स टेक के शेयर घरेलू मार्केट में पिछले साल नवंबर 2022 में घरेलू मार्केट में लिस्ट हुए थे। इसके शेयर एक साल में ही 237 फीसदी अधिक यानी तीन गुना से अधिक बढ़ चुके हैं। इसमें करीब 40 फीसदी की तेजी चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद आई है। इसके चलते रमेश की नेटवर्थ करीब 110 करोड़ डॉलर बढ़ गई। उनकी संपत्ति में इतना इजाफा इसलिए हुए क्योंकि सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से उनके पास कंपनी की 63.54 फीसदी हिस्सेदारी है।

Kaynes Technology Listing: डिफेंस कंपनी का दमदार आगाज, NSE पर 32.54% प्रीमियम के साथ 778 रुपए पर शेयर लिस्ट


Kaynes Technology को Make in India से मिल रहा सपोर्ट

मैसूर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनयरिंग ग्रेजुएट रमेश ने 1988 में इलेक्ट्रॉनिक्स के कॉन्ट्रैक्ट मैनुफैक्चरर के तौर पर कायन्स की शुरुआत की थी। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी पत्नी सविता रमेश ने 1996 में कंपनी ज्वाइन की थी। यह ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस, चिकित्सा और रक्षा उद्योगों को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डिजाइन सर्विसेज मुहैया कराती है जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर वेंटिलेटर और रेलवे सिग्नल में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल में किया जाता है। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसे अपने 13.7 करोड़ डॉलर के सालाना रेवेन्यू का आधे से अधिक हिस्सा प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली के निर्माण से मिलता है।

इस साल की सबसे बड़ी गिरावट से संभला Cipla, इस कारण लौटी शेयरों में खरीदारी

कायन्स को 'मेक इन इंडिया' स्कीम से बहुत लाभ मिला है। देश के सभी उद्योगों में इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते उपयोग के कारण कंपनी का सालाना रेवेन्यू वित्त वर्ष 2020 में 4.9 करोड़ डॉलर से लगभग तीन गुना हो चुका है जबकि इसी अवधि में इसका शुद्ध लाभ दस गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 1.14 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। इस वित्त वर्ष की बात करें तो पहली छमाही अप्रैल-जून 2023 में इसका रेवेन्यू 39 फीसदी उछलकर 7.8 करोड़ डॉलर और शुद्ध लाभ 70 लाख डॉलर पर पहुंच गया। कंपनी को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में इसका रेवेन्यू 20.8 करोड़ डॉलर पर पहुंच जाएगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।