ऐसे समय में जब ग्लोबल कंपनियां 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की सुविधा खत्म कर एंप्लॉयीज को ऑफिस लौटने के लिए कह रही हैं, अमेरिका में हुई एक स्टडी ने सबको चौंका दिया है। इस स्टडी के मुताबिक, तकरीबन 80 पर्सेंट बॉस कर्मचारियों को ऑफिस बुलाने के अपने फैसले को लेकर पछता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें इस बात की बेहतर समझ होती कि उनके एंप्लॉयीज क्या चाहते हैं, तो वे बेहतर तरीके से चीजों की प्लानिंग करते।
यह स्टडी एनवॉय (Envoy) नामक इकाई द्वारा की गई और इसमें अमेरिकी कंपनियों के 1,000 से भी ज्यादा एग्जिक्यूटिव्स और वर्कप्लेस मैनेजर्स को शामिल किया गया, जो हफ्ते में कम से कम एक दिन ऑफिस से काम करते हैं।
एनवॉय के CEO और फाउंडर लैरी गेडिया (Larry Gadea) ने बताया, 'कई कंपनियां यह महसूस कर रही हैं कि बड़े और विवादास्पद फैसले लेने के बजाय वे एंप्लॉयीज के हिसाब से संतुलित फैसला कर सकती थीं।'
स्टडी के मुताबिक, कर्मचारियों को ऑफिस बुलाने के बाद कुछ बॉस अपने ऑफिस की पॉलिसी से संबंधित सफलता के मानकों को हासिल करने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जबकि बाकियों को ऑफिस स्पेस के लिए लॉन्ग टर्म रियल एस्टेट निवेश से जुड़ी अपनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटी में ऑफिस स्पेस की कॉस्ट 16,000 डॉलर सालाना प्रति एंप्लॉयी है।
स्टडी में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को ऑफिस आने के लिए मजबूर करने की वजह से कंपनियों को अपने बेहतर एंप्लॉयीज गंवाने का भी डर सता रहा है। लिहाजा, कंपनियां 'रिटर्न टू ऑफिस' की अपनी पॉलिसी पर फिर से विचार कर रही हैं। रिसर्च से यह भी पता चला है कि जिन कंपनियों ने एंप्लॉयीज को ऑफिस लौटने पर मजबूत किया, उनके पास टर्नओवर से जुड़ी चुनौतियां उन कंपनियों के मुकाबले ज्यादा हैं, जिन्होंने अपने कर्मचारियों को ऑफिस नहीं बुलाया।