40,000 करोड़ का कारोबार छोड़ बौद्ध भिक्षु बना ये युवा, छोड़ा पिता का कारोबार, एयरसेल से है सीधा नाता

अमन नाम के वेन अजाहन सिरिपैन्यो (Ven Ajahn Siripanyo) दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन सकते थे लेकिन उन्होंने अमीर बनने की जगह एक दम उलट फैसला अपने जीवन में लिया। उनके पिता आनंद कृष्णन टेलिकॉम सेक्टर की एक बड़ी हस्ती हैं। उनके पास 40,000 करोड़ रुपये यानी करीब 5 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति है

अपडेटेड Jul 11, 2023 पर 6:38 PM
पिता का 40,000 करोड़ का कारोबार छोड़ बौद्ध भिक्षु बना ये युवा।

अमन नाम के वेन अजाहन सिरिपैन्यो (Ven Ajahn Siripanyo) दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन सकते थे लेकिन उन्होंने अमीर बनने की जगह एक दम उलट फैसला अपने जीवन में लिया। उनके पिता आनंद कृष्णन टेलिकॉम सेक्टर की एक बड़ी हस्ती हैं। उनके पास 40,000 करोड़ रुपये यानी करीब 5 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति है। आनंद ने एक बुद्धिस्ट हैं और वह काफी पैसा शिक्षा और मानवीय हितों के काम में निवेश कर चुके हैं। अब उनका बेटे सिरिपैन्यो ने 18 साल की छोटी उम्र में बौद्ध भिक्षु बनने का अहम फैसला लिया है।

पिता का अरबों का कारोबार छोड़ बन गए बौद्ध भिक्षु

आनंद कृष्णन जिन्हें एके (Anand Krishnan - AK) के नाम से भी टेलिकॉम सेक्टर में जाना जाता है। वह टेलिकॉम सेक्टर के मुगल के तौर पर जाने जाते हैं। वह एयरसेल के भी मालिक थे, जो कभी क्रिकेट के दिग्गज एमएस धोनी की कप्तानी वाली फेमस आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स की प्रमोटर रहे हैं। तमिल मूल के इस परिवार से आने वाले अजाहन सिरिपैन्यो, आनंद कृष्णन के बड़े कारोबारी विरासत को संभालने के लिए तैयार थे, जिसकी कीमत अरबों रुपये में है। आनंद कृष्णन टेलिकॉम, मीडिया, ऑयल और गैस, रियल एस्टेट और सेटेलाइट वेंचर में शामिल हैं। कृष्णन की हिस्सेदारी करीब 9 कंपनियों में है। उनकी दौलत उन्हें मलेशिया के सबसे धनी व्यक्तियों में स्थान देती है।


मस्ती-मस्ती में बन गए मॉन्क

हालांकि, सार्वजनिक रूप से सिरिपैन्यो के मॉन्क बनने के पीछे क्या कारण या प्रेरणा रही, इस बात की कोई जानकारी नहीं है। ऐसा बताया जा रहा है कि उन्होंने शुरूआत में कुछ समय एकांतवास में बिताया और ये सिर्फ मस्ती के लिए किया। एक सिर्फ एक टेंपररी शुरुआत थी जो बाद में रास्ता ही बन गया। उन्होंने पिता के करोड़ों डॉलर के कारोबार को संभालने की जगह सादे जीवन का चुनाव किया।

मां जुड़ी हुई है थाई शाही परिवार से

20 सालों से सिरिपैन्यो एक मॉन्क का जीवन जी रहे हैं। उन्होंने विरासत में मिली संपत्ति और विशेष अधिकारों को त्याग दिया है। अभी वह थाईलैंड में दताओ दम मठ (Dtao Dum Monastery) के मठाधीश के रूप में काम करते हैं। यह भी बताया गया है कि सिरिपैन्यो अपनी मां के वंश के माध्यम से थाई शाही परिवार से जुड़ा हुआ है। हालांकि, उनकी पहले की लाइफ के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। उनका पालन-पोषण उनकी दो बहनों के साथ यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में हुआ था और वह 8 भाषाओं को जानते हैं। वह इन आठ भाषाओं में बातचीत बड़े आराम से कर लेते हैं।

12 जुलाई को खुलेगा Utkarsh SFB का आईपीओ, पैसे लगाने से पहले चेक करें 10 प्वाइंट्स में अहम बातें

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।