दिल्ली में यमुना की हालत काफी खराब हो चली है। अब इस समस्या को सही करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारत की राजधानी नई दिल्ली के सबसे बड़े सीवेज प्लांट का अनावरण हो गया है। इसे नवंबर से शुरू किया जाएगा। यह सीवेज प्लांट सीधे यमुना नदी में जाने वाली गंदगी को साफ करेगा। ओखला में बनाए गए इस संयंत्र का टारगेट रोज 564 मिलियन लीटर पानी को साफ करके यमुना नदी में डालना है। इस संयंत्र को एशिया के सबसे बड़े सीवेज संयंत्रों में से एक माना जाता है।
कब से शुरू होगा यह संयंत्र
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के महानिदेशक (DG) जी अशोक कुमार ने News18 को बताया कि संयंत्र में पानी का प्रवाह 15 नवंबर तक शुरू हो जाएगा। अगले महीने तक, यमुना में गंदा पानी छोड़ने वाले कई नाले रोक दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में भेज दिया जाएगा। इसलिए, हमें दिसंबर तक नदी के पानी की क्वालिटी में पर्याप्त सुधार की उम्मीद है।
कितना प्रभावी होगा यह संयंत्र
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संयंत्र रोज 41,200 किलोग्राम कार्बनिक प्रदूषक और रोज 61,600 किलोग्राम ठोस भार को यमुना से हटा देगा। यह चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, दरियागंज, एनडीएमसी क्षेत्र, लोधी कॉलोनी, निजामुद्दीन, ओखला, बदरपुर, कालकाजी, मालवीय नगर, कटवारिया सराय, लाजपत नगर और ग्रेटर कैलाश जैसे क्षेत्रों के लगभग 40 लाख निवासियों को अपनी सेवा देगा। संयंत्र नवंबर तक उपचारित पानी को यमुना में छोड़ना शुरू कर देगा, लेकिन इसे स्थिर होने में कम से कम कुछ सप्ताह लगेंगे। कीचड़ और बायोगैस उत्पादन की सफाई मार्च 2024 तक शुरू हो सकता है।
दिल्ली में रोजाना पैदा होता है इतना सीवेज
PTI की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल दिल्ली में 792 MCD सीवेज पैदा होता है, और शहर भर में 35 संयंत्र अपनी क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत इस्तेमाल करके 667 एमजीडी तक सीवेज को साफ कर सकते हैं। लगभग 242 एमजीडी सीवेज सीधे नदी में जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 35 परिचालन संयंत्रों में से केवल 10 ही हर दिन 150 मिलियन गैलन गंदे पानी को साफ कर सकते हैं।
दिल्ली सरकार 2025 तक इतना साफ किया जा सकेगा यमुना का पानी
दिल्ली सरकार की योजना फरवरी 2025 तक स्नान मानकों के अनुरूप यमुना को साफ करने की है। द वीक के मुताबिक, इन मानकों को पूरा करने के लिए जैव रासायनिक ऑक्सीजन की मांग तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होनी चाहिए, और घुलनशील ऑक्सीजन की मांग पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होनी चाहिए। दिल्ली प्रशासन नजफगढ़, सप्लीमेंट्री और शाहदरा नालों में 10 अलग-अलग जगहों पर इन-सीटू ट्रीटमेंट जोन बनाने की योजना बना रहा है।