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Atal Bihar Vajpayee: शिमला समझौते से पहले इंदिरा गांधी को खबरदार करना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी, फिर हुआ ये

Atal Bihar Vajpayee Birthday Special: वे इसे लेकर वहां एक जनसभा करना करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इजाजत नहीं मिली। वैसे शिमला समझौते के समय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष पीलू मोदी भी शिमला पहुंच गए थे। अटल जी चाहते थे कि इंदिरा गांधी, जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ नरम रुख नहीं अपनाएं। दूसरी ओर, वहां पीलू मोदी अपने दोस्त ‘जुल्फी’ के साथ के अपने पुराने दिन याद कर रहे थे

Surendra Kishoreअपडेटेड Dec 21, 2023 पर 9:08 PM
Atal Bihar Vajpayee: शिमला समझौते से पहले इंदिरा गांधी को खबरदार करना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी, फिर हुआ ये
Atal Bihar Vajpayee: शिमला समझौते से पहले इंदिरा गांधी को खबरदार करना चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी, फिर हुआ ये

Atal Bihar Vajpayee Birthday Special: सन 1971 के भारत-पाक युद्ध (Indo-Pak War 1971) के बाद 2 जुलाई 1972 को शिमला में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इंदिरा सरकार को खबरदार करने के लिए जनसंघ अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) तब शिमला में मौजूद थे। शिमला समझौते (Shimla Agreement) पर प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और पाक के राष्ट्रपति जुल्फीकार अली भुट्टो (Zulfikar Ali Bhutto) ने दस्तखत किए। समझौते की शर्तों से जनसंघ अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी संतुष्ट नहीं थे। वे इसे लेकर वहां एक जनसभा करना करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इजाजत नहीं मिली।

वैसे शिमला समझौते के समय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष पीलू मोदी भी शिमला पहुंच गए थे। अटल जी चाहते थे कि इंदिरा गांधी, जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ नरम रुख नहीं अपनाएं। दूसरी ओर, वहां पीलू मोदी अपने दोस्त ‘जुल्फी’ के साथ के अपने पुराने दिन याद कर रहे थे।

साथ ही, यह घोषणा कर रहे थे कि मैं जुल्फी पर किताब लिखूंगा। याद रहे कि दोनों छात्र जीवन में सहपाठी थे। अगले साल पीलू मोदी की वह किताब आ भी गई। उसका नाम है ‘जुल्फी माई फ्रेंड।’

याद रहे कि अमरीका में पढ़ाई के दौरान जुल्फी और पीलू एक ही आवास में रहते थे। भारतीय सेना ने 1965 के युद्ध में जो उपलब्धि हासिल की, उसे भारत सरकार ने 1966 के ताशकंद समझौते में गंवा दिया था।

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